शांति - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
वह इंसान बहुत भाग्यशाली है,
जिसके जीवन में शांति है।
वरना आजकल तो चारों ओर, दिखती केवल अशांति है।
शांति पाने के लिए,
हम जीवन भर मेहनत करते हैं।
पर अधिकांश लोग जीवन भर, शांति से दूर ही रहते हैं।
आज देश में अधिकांश जगह, अशांति ही दिखती है।
विद्रोह की बातें, हमें ज्यादा सुनने को मिलती हैं।
अशांति कभी अच्छी नहीं होती, चाहे घर हो, परिवार, देश या संसार।
हम अपने कर्तव्य पर कम ध्यान देते हैं,
मांगते हैं तो केवल अपना अधिकार।
शांति हमें प्यारी होती,
पर हमारे पास यह नहीं टिकती।
शांति के लिए हमें ही प्रयास करना होगा, यह बाजार में नहीं बिकती।
मतभेद हो सकता है, उसको देना नहीं तूल।
सबसे प्यार से बातें करना, उनकी गलती जाना भूल।
शांति से अपनी बात कहना,
शांति से औरों की सुनना।
अशांत वातावरण में,
अपने पैर क्यों रखना?
मन की शांति के लिए, स्वस्थ तन होगा रखना।
'ढाक के तीन पात' बने रहने से अच्छा है, खुद को बदलना।
विश्व शांति दिवस 21 सितंबर को मनाया जाता है।
शांति जीवन में हो, मानव आगे बढ़ता जाता है।
सफेद कबूतर को, शांति का प्रतीक माना जाता है।
शांत मन ऊर्जा से भरा रहता, यही बताया जाता है।
मन यदि शांत हो, हम निर्णय ले पाते हैं सही।
मन यदि अशांत हो, किसी
कार्य में मन लगता नहीं।
हम भारतवासी, 'जियो और जीने दो' में विश्वास करते हैं।
भारत एक शांतिप्रिय देश है, ऐसा संसार के लोग कहते हैं।
शांति के लिए यदि थोड़ा झुकना पड़े, झुक जाना जरूर।
ऐसा अहंकार किस काम का, जो तुमको अपनों से ही कर दे दूर।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' स्वरचित
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