Thursday, 9 April 2026

शिष्य - डो. गुलाबचंद पटेल

शिष्य - डो. गुलाबचंद पटेल

जीवन मे मनव जाति के विकास के कुछ मार्ग दर्सक सिधान्त है वो जीवन में अपना ने से जेवन को सामन्य से उछतम जीवन प्रदेश में ले जाने में सफल्ता प्राप्त होती है. दिव्य मानवता की ओर ले जाती है शिष्यत्व या फिर चेला प्रथम स्तर पर उमेद्वार होता है. शिष्य बन ने से निस्छित साधनो कि प्राप्ति होती है. लेकिन चेला पद या शिष्य्तव के मार्ग पर कुछ निस्छित साध्नो कि प्राप्ति कर सक्ते है लेकिन जिस रुप्मे उस कशा में जिस तरह अंकित किये गये है इस तरह स्पश्ट अंकित नहि होते है. सत्य के मार्ग पर चलने वाले शिश्य को उस्के गुरु पचानते है. इत्ना ही नहि शिष्य उस्के गुरु को पचान्ता है. उस मार्ग में चार स्तर है जो चार दिकषओ के के रुप मे माना जाता है.

शिष्य या चेला के पास उस मार्ग पर पुर्ण रुप से चले एसी उम्मिद नहि रखी जाती वो प्यास करे एसी अपेक्षा रखी जाती है. यदि वो अपने प्रयास में दिल से करता हो ध्येय को साथ रखकर चलता हो उस्का मन विचलित न होता हो, अग्ने मार्ग या लक्ष्य को भुलता न हो इतना तो इतना काफि है. उसे कुछ चिजो में क्षमा दी जाती है. मानव जीवन में जितनी मुश्केलिया आती है इतनी ही मुश्केलिया उस मार्ग में चलने पर आती है. कुछ साल पह्ने कल्कता के ब्राहण बंधु थियोसोफीकल सोकिएत्य के सदस्य श्री मोहीनी मोहन चेतर्जी ने जब वे इंग्लैंड में थे तब उमेद्वार शिष्य के जीवन के सिधांत हिंदु शात्रोमे से दिये थे. शिष्य को अप्ने ध्येय सिध्ध करने मे गुरुदेव से कुछ सहायता प्राप्त होती है. उसे वो अग्यान के रुप मे मिलती है. जाग्रत रुप्मे उस्की जांनकारी के बिना प्राप्त होती है. शिष्य को एसा लगता है कि उसे अपनी शक्ति या बल पर प्राप्त हो रहा है. उसे एसा लग्ता है. अपने गुरुकी नजर उस पर होती है.

उसे सत्य असत्य शाख्त और क्षणिक के बीचके अंतर को सिखाता है. दुस्रा साधन वैराग्य है. तिस्रा साधन षट सम्पति है. शिष्य के जीवन में छह मांसिक गुण प्रगट होने चाहिये सत्य के दर्शन से सहिश्णुता प्राप्त कर्मीहोती है. अप्ने गुरुदेव मे श्रधा रखनी होती है. मन् मे प्रसन्न्ता, समाधान और धीरज के गुण होने चाहिये अनायस चौथा साधन मुमुक्षा पर उस्की द्रष्टि जाती है. मोक्ष की झंख्नना होती है. मुक्ति प्राप्त करने की इस्छा होती है. शिष्य को अपने गुरुकी आग्या का पालन किसी भी परिस्थिति में करना होता है.

नाम : डो. गुलाबचंद पटेल

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