Tuesday, 21 April 2026

बर्बादी - सपना

 
 बर्बादी - सपना 

बर्बादी यूँ ही नहीं उतरती जीवन में,
यह धीरे-धीरे पनपती है,
चुपके से दिल में घर करती है,
और फिर सब कुछ अपना सा लगता है उसे।

कभी यह सपनों की राख बनकर आती है,
तो कभी उम्मीदों की लौ बुझा जाती है,
चेहरे पर मुस्कान रहती है,
पर भीतर से इंसान टूट जाता है।

बर्बादी सिर्फ खोने का नाम नहीं,
यह खुद को भूल जाने की कहानी है,
जहाँ इंसान आईने में खुद को ढूँढता है,
पर पहचान कहीं खो चुकी होती है।

रिश्ते भी तब पराये लगने लगते हैं,
जब विश्वास की डोर कमजोर हो जाए,
और शब्दों की गर्माहट भी,
दिल के ठंडेपन को पिघला न पाए।

पर हर बर्बादी के बाद एक सवेरा भी होता है,
जो सिखाता है फिर से जीना,
राख से उठकर फिर खड़ा होना,
और खुद को फिर से पाना।

बर्बादी अंत नहीं है जीवन का,
यह एक कठिन मोड़ भर है,
जो संभल गया वो जीत गया,
वरना यही मोड़ सबसे बड़ा सबक है। 


परिचय
नाम - सपना 

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