धोखेबाजों का बोलबाला - डॉ पी सी कौंडल
आज के जमाने में धोखेबाजों और चालबाजों का बोलबाला है।
सच्चाई के विरुद्ध धोखेबाज गुंडों ने मोर्चा संभाला है।।
धोखेबाज गुंडागर्दी खुद करते, इल्जाम औरों पर जड़ देते।
झूठी दफाएं जुर्म की वे औरों पर गढ़ देते।।
धोखेबाज झूठे गवाहों के जरिए जुर्म को सिद्ध कर देते।
बेगुनाहों को गुनाह कबूल करने को विवश कर देते।।
गुनाह कबूल न करे तो पुलिस डंडे सर पर जड़ देते।
मार मार कर पुलिस वाले गरीबों को लॉकअप में बंद कर देते।।
धोखेबाज एक खूंखार गुंडा खुद को दादा कहता है।
अफसरों और पुलिस वालों से मिलकर वो हमेशा रहता है।।
सरकारी भूमि पर उसने खुद नाजायज कब्जा कर रखा है।
धोखे और चालबाजी से पड़ोसी के विरुद्ध मुकदमा कर रखा है।।
पड़ोसी बेचारा गरीब मेहनत मजदूरी करता है।
तब कहीं जाकर वो अपने बाल बच्चों का पेट भरता है।।
पटवारी गिरदावर से मिलकर गरीब पड़ोसी का घर गिरवा दिया।
धोखेबाज उस गुंडे ने उससे नाजायज कब्जा कबूल करवा लिया।।
उस गुंडे के कहने पर पुलिस ने गरीब के विरुद्ध मुकदमा कर दिया।
अदालत के आदेश ने भी सबको अचंभित कर दिया।।
वो गरीब बेचारा दर दर की ठोकरें खाने लगा।
हार कर उस धोखेबाज गुंडे के पास जाकर माफी की दुहाई करने लगा।।
तब भी उस गुंडे धोखेबाज को गरीब पर तरस न आया।
उल्टा पुलिस वालों से उस गरीब को खूब मरवाया।।
सच में आज धोखेबाजों और चालबाजों का बोलबाला है।
सच्चाई के विरुद्ध धोखेबाज गुंडों ने अब मोर्चा संभाला है।।
डॉ पी सी कौंडल, वरिष्ठ साहित्यकार,

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