Saturday, 2 May 2026

अपनापन का दुश्मन है: मौकापरस्ती सोच - रजनीश कुमार "गौरव"

अपनापन का दुश्मन है: मौकापरस्ती सोच - रजनीश कुमार "गौरव"
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इस आधुनिक युग को भले हम जो भी नाम दें, मगर नामकरण के इसी क्रम में इसे मौकापरस्त लोगों का ज़माना  भी कहने में हमें झिझक  नहीं होनी चाहिए । लोग यू ही नही कहते है कि 'यही दुनिया है जिसे पहचानना मुश्किल है; और मैं तो कहता हूं -
*"बहुत मुश्किल है यह कहना , कि कौन गैर है और कौन है अपना"*
इन दिनों हर क्षेत्र में ऐसे व्यवहार सम्पन्न लोगों की भरमार है ;क्योंकि लोगों के पास अवसर वादी सोच के अलावा उनके पास ईमान, विचार और सिद्धांत जैसा कोई विकल्प शायद नहीं बचा हैं, जिस कारण ऐसे लोग अपने लोग, परिवार, समाज, देश, संस्था अथवा मातृ दल के साथ वफादारी करते रहने को मजबूर भी नहीं हैं। इसलिए वो बदल जाते हैं आप उन्हें धोखेबाज कहे या गद्दार उन्हें कोई फ़र्क नहीं पड़ता है।वैसे इंसान आगे बढ़ने का शॉर्ट कॉर्ट तरीका अपना लिया है और मतलब की पूर्ति होने के बाद वही व्यक्ति फ़िर किसके साथ नज़र आने लगे कहना मुश्किल है।जब विचार और सिद्धांत समाज से दरकिनार होने लगे और उसका जगह  पैसा और पद लेने लगे तो ऐसा होना लाज़मी हैं। 
इसलिए हमें वैचारिक रुप से गंभीर और सैद्धांतिक रूप से सशक्त होने की ज़रूरत है ताकि जिन ईमानदार लोगों के बदौलत यह धरती टिकी हुई है उसके साथ हम भी सहभागी हो सके और इस देश के भरोसेमंद लोगों की सूची में हमारा भी नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज़ हो । लोगो का हम पर इतवार न हो, हमें कोई प्रायः संदेश के नजरों से देखे  तो ऐसी ज़िंदगी का क्या मतलब! जिसमें ईमानदारी और वफादारी का घोर आभाव हो ?
     अपनापन की रक्षा के लिए कम से कम हमें मौकापरस्त व्यहवार का परित्याग करने की आवश्यकता है।
        - रजनीश कुमार "गौरव"
           सारण ,बिहार

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