गद्यार - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
गद्दारी करने वाले, कभी आगे नहीं बढ़ पाते।
वफादारी जो निभाते, सबके दिल में वे बस जाते।
अपने हित के लिए सब लड़ते हैं, कभी दूसरों के हित के लिए लड़ लेना।
गद्दारी करना छोड़, मानवता की राह चुन लेना।
विश्वासघात करना, गद्दारों की होती है फितरत।
अपमानित होते ये सब जगह, कोई न करता इनकी खिदमत।
कई बार अपने भी, भरोसा तोड़ देते हैं।
थोड़े से लालच की खातिर, परिजनों को छोड़ देते हैं।
जिसने भी गद्दारी की, वह नहीं है माफी के काबिल।
सच्चाई के पथ पर चलना, इतना भी नहीं मुश्किल।
हर मीठा बोलने वाला, मित्र नहीं कहलाता।
मुंह पर आप, पीछे सांप मुहावरा, इनके व्यक्तित्व से कई बार मेल खाता।
कुछ लोग सामने मीठा बोलते, पीठ में घोंपते छुरा।
ये किसी की भलाई नहीं कर सकते, करते हैं सबका बुरा।
गद्दारों सावधान हो जाओ, ज्यादा दिन गद्दारी नहीं चलती।
निष्ठावान व्यक्तियों की, कीर्ति फैलती।
देश के लिए जियो, गद्दारी से कुछ नहीं मिल पाता।
देशभक्त हर जगह, इज्जत पाता।
देश के गद्दारों को, माफ नहीं किया जाता।
विश्वासी, ईमानदार व्यक्ति, सब जगह आदर पाता।
गद्दारों गद्दारी छोड़ो, ईमानदारी का थामो दामन।
खुद भी चैन से जिओ, देश में रहेगा अमन।
बच्चों को हमें बचपन से ही, वफादारी सिखानी होगी।
किसी का भरोसा न तोड़ो,
उन्हें यह बात समझानी होगी।
देशभक्ति के भाव बच्चों के मन में, बचपन से ही जगाना होगा।
ईमानदारी, जिम्मेदारी का पाठ, बचपन से ही पढ़ाना होगा।
गद्दारी को देश से, हमें ही मिटाना है।
गद्दार मुक्त भारत देश, हमें ही तो बनाना है।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
वैस्ट बंगाल
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