Monday, 18 May 2026

मेरी क़लम - डा, तरूण राय कागा

मेरी क़लम - डा, तरूण राय कागा 

मेरी क़लम मेरी पहचान अता-पता नामो-निशान,

चलती सियाही ख़ून बन अता-पता नामो-निशान।

        ह़ालात बदतर लूट-खसोट मची हाय तोबा बन,
        सेयाद ठहरा शेतान आम अ़वाम ह़ेरान परेशान हैं।

अफ़रा-तफ़री का आलम मसायल का ह़ल नहीं,
सरे बाज़ार में खरीद-फरोख्त करना आसान है।

        नहीं निकाह़ी ब्याही दुल्हनिया बहू कहां से आई,
        बिना दुल्हे की बारात सारी नोटंकी बदनाम है।

खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे रुक-रूक कर कागा,
करती म्याऊं-म्याऊं घूम-घूम दोगली दास्तान है 

क़लमकार 
डा, तरूण राय कागा 
 पूर्व विधायक 
कवि साहित्यकार

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