Friday, 22 May 2026

सोना - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

सोना - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

सोना एक धातु है, सबको अच्छा लगता है।
शुभ काम में अक्सर, सोने का जरूरत पड़ता है।
सोना पहन महिलाएं, अपनी शान दिखाती हैं।
उनके सोने का आभूषण देख, अन्य महिलाएं ललचाती हैं।
सोना की जुबान नहीं होती, 
पर बहुत कुछ कह जाता है।
सोना अगर पास हो, आत्मविश्वास बढ़ जाता है। 
कहते हैं, हर चमकती चीज सोना नहीं होती। 
सोना अगर पास हो, 
चेहरे की चमक देखने लायक होती।
सोना होता कीमती, सबके पास नहीं होता। 
सोने का प्रयोग, औषधि बनाने में भी होता।
अन्य धातु पर भी,
सोने का पॉलिश चढ़ता है।
धन और समृद्धि का प्रतीक सोना, मुसीबत में सच्चा साथी बनता है।
शुद्ध सोना खरा है होता।
पीले रंग की बहुमूल्य धातु सोना, सबकी चाहत होता।
कहते हैं, सोना आग में तप कर ही बनता है कुंदन।
हमारे वीर, जो सरहद पर लड़ते हैं, करते हम सब उनका अभिनंदन।
जब दो अच्छी चीजें एक साथ मिल जाए, सोने पर सुहागा कहलाता। 
खूबसूरती और गुण दोनों हो, 
सोने में सुगंध आ जाता।
सोने की चिड़िया कहलाया, अपना भारत देश। 
खुद पर हम गर्व करते हैं, 
जन्म लिए हम इस देश।
ईश्वर ने जो दिया है उसे संभाल कर रखो, जाते देर नहीं लगती। 
सोना मिट्टी हो जाता, देर नहीं लगती।
स्वर्ण पदक जब हमको मिलता,
खुशी का ठिकाना नहीं होता।
जिसके पास सोना नहीं है वह सोचता है, काश मेरे पास भी सोना होता।
बुरे दिनों में सोना साथ निभाता,
सच्चा साथी बन जाता है। 
आजकल सोने पर बैंक कर्ज देता, काम मनुज का चल जाता है।
सोने का महत्व है, क्योंकि यह आग में तपता है।
कठिन परिस्थिति में जो धैर्य रखता,  उसको ही लक्ष्य मिलता है।
सोने जैसा दिल रखो बंधु, औरों के दुख में काम आओ। 
हम भी किसी से कम नहीं, दुनिया को यह बतलाओ।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित

No comments:

Post a Comment