Thursday, 28 May 2026

नफरत जिंदा है प्यार से* - संजय जैन "बीना"

नफरत जिंदा है प्यार से*
विधा : कविता

मन से कोई भाग न पाया। 
दिल से क्या तुम भागोगें। 
प्यार मोहब्बत के बंधन को। 
क्या पवित्रता से निभाओंगे।। 

हर मौसम में आंधी है। 
हर मौसम में प्यार बहुत। 
जीने के तरीके अलग है। 
पर परिभाषा सबकी एक है।। 

बिना स्नेह और मिलनसार का। 
जीवन बिल्कुल शून्य है। 
आंधी आये तूफान आये। 
प्यार कभी कम होता नही।। 

नफरत को जिंदा रखने को। 
प्यार का होना जरूरी है। 
देख प्यार को लोगों के तब। 
नफरत जलन काम करती है।। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई
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