Tuesday, 11 August 2026

जिन्दगी


अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 

       जिन्दगी  : महाकवि डा अनन्तराम चौबे

जीवन और मृत्यु के बीच 
जिन्दगी इम्तिहान लेती है ।
सुख दुख भी आते जाते हैं
ग़म और खुशी भी मिलती है ।

भागती इस जिन्दगी का 
ठिकाना कहां पर होता है ।
इंसान का जीवन यों ही 
चंचल चलायमान होता है । 

जीवन और मृत्यु के बीच 
कठपुतली सा जीवन चलता ।
मोह माया के जाल में फंसकर 
जीवन सभी का चलता रहता है ।

जिन्दगी मिली है जीने को
खुशियों से हंसकर जीलो।
जीवन मिला है जीने को
सभी  से हिल मिलकर जीलो ।

खुशी और गम आते जाते हैं
पल पल में समय बदलते हैं ।
कल कब ये किसने देखा है
कल होगा उससे भी मिलते हैं ।

जन्म और मृत्यु के बीच में
जीवन सभी का चलता हैं ।
गम, खुशियां साथ में चलती 
जीवन भी साथ में चलता है ।

माता पिता भाई बहिन से
एक घर परिवार बनता है ।
जिन्दगी की राहें चलने को
इनसे मिलकर ही चलता है ।

माता पिता की शिक्षा पाकर
जीवन की राहें संभलती है ।
बच्चों की खुशियों से माता,
पिता को खुशियां मिलती है ।

हंसी खुशी से जी लो जिन्दगी
हर पल खुशियां मिलती हैं ।
तन मन को भी खुश रखना है
जिन्दगी में खुशियां मिलती हैं ।

भागती जिंदगी का ठिकाना 
जीवन मृत्यु के बीच में होता है।
हर इंसान का जीवन  देखो
भ्रमजाल में भटकता रहता है। 

इन नरिश्तो के भंवर जाल 
यहां वहां भटकता रहता है ।
घर द्वार के ऐशो आराम में
सब कुछ ही भूला रहता है ।

माता पिता की सेवा कर लो
दुखी कभी न उनको करना ।
माता पिता से जो मिला है
उसी से जिन्दगी में खुश रहना 

ज़िन्दगी के इस सफर में
दान पुण्य भी कुछ कर लो ।
समय निकाल कर  अपना
भगवान भजन भी कुछ कर लो  

न कुछ तेरा न कुछ मेरा
बस चिड़िया रेन बसेरा है ।
पिंजड़े से पंछी उड़ जायेगा
ये तो मोह माया का डेरा है ।

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