Tuesday, 18 August 2026

नया दौर: कॉकरोच पार्टी और Gen-Z का धमाका / जौली अंकल

     

                                  नया दौर: कॉकरोच पार्टी और Gen-Z का धमाका / जौली अंकल

 
आजकल देश की हवा में कुछ अलग ही ताज़गी देखने को मिल रही है। वही पुरानी सियासी गपशप और वही टी-स्टॉल वाली बहसें हैं, लेकिन इस बार कहानी में एक बड़ा मोड़ आ चुका है। सालों से हमारे देश का आम आदमी एक आदर्श मौनव्रती बना हुआ था। उसने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, बिल भरे, टैक्स दिए और चुपचाप सिर झुकाकर निकल गया। सरकारें भी आराम से कुंभकर्णी नींद सो रही थीं, क्योंकि उन्हें पता था कि जनता के पास सवाल पूछने की फुरसत ही कहाँ है। लेकिन अब पर्दा उठ चुका है और मंच पर आज की नई Gen-Z पीढ़ी की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है। इस नई पीढ़ी ने वह अद्भुत कार्य कर दिखाया है जो बड़े-बड़े राजनेता भी वर्षों में नहीं कर पाए। इन्होंने सोती हुई सत्ता को झकझोर कर जगा दिया है और आम आदमी को उसकी खोई हुई आवाज़ पुनः लौटा दी है।
 
इस नए दौर की सबसे दिलचस्प और क्रांतिकारी उपज कॉकरोच पार्टी का जन्म है। अब आप सोचेंगे कि भला कॉकरोच पार्टी का राजनीति से क्या संबंध हो सकता है। ज़रा गहराई से विचार कीजिए। कॉकरोच वह जीव है जिसे आप जितना भी दबाने का प्रयास करें, वह किसी भी कोने या दरार से बाहर निकल ही आता है। ठीक उसी प्रकार, आज का युवा किसी भी तानाशाही या उपेक्षा के आगे झुकने वाला नहीं है। सोशल मीडिया के डिजिटल माध्यमों से लेकर सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों तक, युवाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें नज़रअंदाज़ करना अब किसी के लिए भी संभव नहीं है। अब प्रत्येक राजनेता और प्रशासनिक तंत्र को यह भली-भांति समझ आ गया है कि देश की सबसे बड़ी सामर्थ्य कोई कागज़ी फाइलें नहीं, बल्कि इस देश की युवा शक्ति है। Gen-Z का यह आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प सच में अनुकरणीय है।
 
यहाँ हमारे आदरणीय अभिभावकों को भी अपने दृष्टिकोण में थोड़ा परिवर्तन लाने की आवश्यकता है। प्रायः घर के बुजुर्ग बच्चों को सलाह देते थे कि इन पचड़ों में मत पड़ो और केवल अपनी पढ़ाई व नौकरी पर ध्यान दो। अब वह समय बीत चुका है। बच्चों को अधिक संवेदनशील या भयभीत मत बनाइए। उन्हें प्रारंभिक जीवन से ही अपने न्यायसंगत अधिकारों के लिए तत्पर रहना और निर्भीकता से संवाद करना सिखाइए। यदि बचपन में अपने अधिकारों के लिए बोलना नहीं सीखा, तो भविष्य में समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को निभाना कठिन हो जाएगा। देश का युवा यदि आज अपनी बात स्पष्टता से रख रहा है, तो यह उसकी बदतमीज़ी नहीं, अपितु एक सशक्त और जागरूक राष्ट्र के निर्माण का संकेत है।
 
दूसरी ओर हमारी सरकारों को भी यह तथ्य स्वीकार करना होगा कि जनता ने यदि आपको जनप्रतिनिधि चुना है, तो आपकी प्रथम प्राथमिकता जनता के प्रति पूर्ण जवाबदेही होनी चाहिए। चुनाव के समय तो हाथ जोड़कर जनता जनार्दन के समक्ष नतमस्तक हुआ जाता है, परंतु सत्ता प्राप्त होते ही जनहित को पृष्ठभूमि में धकेल देना उचित नहीं है। अब कोई भी नया नियम, नीति या योजना लागू करने से पूर्व यह गहन विचार करना आवश्यक है कि क्या यह निर्णय वास्तव में जनकल्याण के अनुकूल है या नहीं। आधुनिक लोकतंत्र में एकतरफा आदेशों से शासन नहीं चलाया जा सकता। अब तो आपसी समन्वय, निरंतर संवाद और पूर्ण पारदर्शिता से ही कुशल प्रशासन संभव है।
 
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक स्वस्थ लोकतंत्र में प्रश्न पूछने की संस्कृति को सदैव प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यदि कोई जागरूक नागरिक या युवा सरकार से विकास कार्य अथवा सार्वजनिक नीतियों पर प्रश्न करता है, तो उसे किसी भी प्रकार की नकारात्मक संज्ञा देना सरासर अनुचित है। तर्कसंगत प्रश्न पूछना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, कोई राष्ट्रविरोधी कृत्य नहीं। लोकतंत्र की वास्तविक सुंदरता इसी में निहित है कि जनता निसंकोच प्रश्न करे और सरकार पूर्ण विनम्रता व उत्तरदायित्व के साथ उसका समाधान प्रस्तुत करे। जौली अंकल भी इस बात को मानते है की इस नए दौर ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब देश का युवा संकल्पबद्ध होकर जागृत होता है, तो परिवर्तन की एक नई कहानी लिखी जाती है। इसलिए मुस्कुराते रहिए, जागरूक बने रहिए और इस नए दौर की सकारात्मक ऊर्जा का मज़ा लीजिए।
- जौली अंकल

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