Friday, 28 March 2025

किसान - डॉ.सर्ताज पि. एच

 


किसान - डॉ.सर्ताज पि.एच

https://sarasach.com/?p=385

मैसूर, कर्नाटक. 

किसान हमारे समाज की रीढ़ हैं। वे अन्नदाता हैं, जिनकी मेहनत और समर्पण से पूरी दुनिया को भोजन प्राप्त होता है। भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर हैं। कृषि न केवल हमारे आर्थिक विकास का मुख्य आधार है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है।

भारत में कृषि का इतिहास हजारों साल पुराना है। प्राचीन समय से ही खेती यहाँ की प्रमुख आजीविका रही है। हमारे देश की लगभग 70% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़ी हुई है। खाद्यान्न उत्पादन, दुग्ध उत्पादन, और रेशम उद्योग जैसे क्षेत्रों में कृषि का योगदान अत्यधिक है। कृषि न केवल भोजन उपलब्ध कराती है, बल्कि अन्य उद्योगों के लिए कच्चा माल भी प्रदान करती है।

किसान का जीवन सरल और कठोर परिश्रम से भरा होता है। वह सूरज उगने से पहले उठता है और दिनभर खेतों में मेहनत करता है। उसकी दिनचर्या प्रकृति और मौसम पर निर्भर करती है। बारिश, सूखा, या प्राकृतिक आपदाओं का सीधा असर उसकी फसलों और आय पर पड़ता है। इसके बावजूद किसान अपने कर्तव्य को निभाने में कोई कमी नहीं करता।किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भूमि का घटता उपजाऊपन, जलवायु परिवर्तन, अपर्याप्त सिंचाई सुविधाएँ, और उन्नत कृषि उपकरणों की कमी उनकी उत्पादकता को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, बाजार में उचित मूल्य न मिलना, बिचौलियों का हस्तक्षेप, और कर्ज का बोझ उनकी समस्याओं को और बढ़ा देता है।

      आज के समय में कृषि में तकनीकी विकास हो रहा है। ट्रैक्टर, थ्रेशर, और अन्य आधुनिक उपकरणों ने किसानों के कार्य को आसान बना दिया है। इसके अलावा, जैव प्रौद्योगिकी, सटीक खेती, और ड्रोन तकनीक के उपयोग से कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहे हैं। डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से किसान अब बाजार की जानकारी और नवीनतम कृषि तकनीकों तक आसानी से पहुँच पा रहे हैं। किसानों का सम्मान और उनका समर्थन करना हमारा कर्तव्य है। हमें उनकी समस्याओं को समझकर उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करनी चाहिए। जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को किसानों की मेहनत का महत्व समझाने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष:

किसान हमारे देश की समृद्धि के प्रतीक हैं। उनके बिना हमारा जीवन असंभव है। इसलिए हमें उनकी मेहनत और योगदान का सम्मान करना चाहिए। किसान को केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक समर्थन भी प्रदान करना चाहिए। एक खुशहाल और सशक्त किसान ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव रख सकता है।

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मकर संक्रांति - गोरक्ष जाधव


मकर संक्रांति - गोरक्ष जाधव

https://sarasach.com/?p=382

संक्रांति संक्रमण है जीवन का,
सूरज के नित्य भ्रमण का,
नव-नूतन नित्य बदलाव का
संकेत है गतिमान ऋतुचक्र का।

पतंग बन आसमान छूने का,
उड़कर भी नभ में धरा से जुड़े रहने का,
त्योहार है उम्मीद और उमंगों का,
तिल-गुड़ के गूढ़ से आपसी मेलजोल का। 

त्योहार है स्नान, दान, पुण्य का,
शून्य के सामर्थ्य की पहचान का,
त्योहार है भानु को अर्पित भोग का,
ज्ञान,विज्ञान और आध्यात्म के संयोग का।

त्योहार है अटूट विश्वास और श्रद्धा का,
त्योहार है धरती के सामर्थ्य का,
समृद्धि-संपन्न बने जीवन मनुष्य का,
त्योहार है मनुष्य को सुसंस्कृत बनाने का।

गोरक्ष जाधव©®
मंगलवेढा, महाराष्ट्र

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Thursday, 27 March 2025

कुम्भ - डॉ० अशोक

 


कुम्भ  - डॉ० अशोक

https://sarasach.com/?p=378

मां की दुआओं से,
निकली हुई आवाज में घुली हुई प्यार और प्रेम में,
सही कुम्भ स्नान है।
इसकी महत्ता को देखते हुए,
सब कहते हैं कि,
यही हकीकत है,
यही सही दौलत है,
सही मुकाम पर पहुंचाने वाली ताकत है,
यही पवित्र स्नान है।

सबकी अपनी अपनी दुनिया है,
मेरी जिंदगी में,
मां ही दुनिया है,
मां ही मंदिर है,
मां ही शाही स्नान है।
इसकी वजह से ही,
हिम्मत है,
आन-बान और शान है।

मां ही जन्नत है,
सबसे खूबसूरत उपहार है,
खुशियां भरपूर मिले,
यही हकीकत है,
मां को यही स्वीकार है।

मां की दुआओं से,
निकली हुई आवाज में,
सारा जग संसार है।
उन्नति और प्रगति से भरपूर,
सब संसार है।

हमें आनन्द और प्रसन्नता से,
हंसी होंठों पे रख कर,
उम्मीद बनाएं रखने में मदद करने वाली ताकत है,
इसकी वजह से ही,
दुनिया में हम-सब मुस्कुराते हुए रहते हैं,
इसकी वजह से ही,
इसकी सोहबत रखनी चाहिए,
यही कारण है कि सब लोग अक्सर सोचते और कहते हैं कि,
मां ही जन्नत है,
मां ही मंदिर है,
मां ही दुनिया में,
सबसे खूबसूरत इबादत है।

डॉ० अशोक,पटना,बिहार

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गंगा नदी - डाॅ0 उषा पाण्डेय

 


गंगा नदी - डाॅ0 उषा पाण्डेय 

https://sarasach.com/?p=376

गंगा नदी है पावन,
निर्मल है धार।
गंगा माँ, आपको नमन 
मैं करती बारम्बार।
गंगा नदी का उद्गम गंगोत्री, 
भागीरथी भी कहलाती हैं
अपने भक्तों को माँ आप,
सुख और शांति देती हैं।
माँ, अपने भक्तों का।
कल्याण आप सदा ही करतीं।
वह भूमि उपजाऊ होती 
आप जहाँ से गुजरतीं।
मोक्षदायिनी हैं गंगाजल,
करतीं पापियों का उद्धार।
गंगा मईया आपको नमन,
मैं करती बारम्बार 

पावन आपका जल है माँ, 
आप अविरल बहती रहती हैं।
शिव जी की जटा में माँ,
आप निवास करती हैं।
इस धरा पर आकर माँ,
राष्ट्रीय नदी कहलाती हैं।
जाह्नवी, मंदाकिनी आदि
कई नामों से जानी जाती हैं।
आपकी पूजा करें माँ,
 हम सपरिवार।
गंगा माँ,  आपको नमन 
मैं करती बारम्बार 

आपकी महिमा हम, शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते।
आपकी गरिमा का
हम बखान नहीं कर सकते।
पर, हमारे ही कारण माँ
आप प्रदूषित हो रहीं
हम मानव ही के कारण ही
माँ, आप गंदी हो रहीं।
अपनी गलती को अब
 हम हैं मानने को तैयार।
गंगा मांँ, आपको नमन 
मैं करती बारम्बार 

हम सब को माफ करें माँ,
हम यह प्रण लेते हैं।
अब न कभी गंदा डालेंगे
हम वचन देते हैं
आपके सौन्दर्यीकरण पर माँ अब हम देंगे ध्यान।
आपको हम सब साफ करेंगे,
रखेंगे हम आपका मान।
अपनी कृपा बनाये रखें,
दें हमें खुशियाँ अपार।
गंगा माँ, आपको नमन मैं
करती बारम्बार 

गंगा नदी, है पावन
निर्मल है धार।
गंगा माँ, आपको नमन 
मैं करती बारम्बार

डाॅ0 उषा पाण्डेय 
स्वरचित

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चलो चले महाकुंभ - पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश

 


चलो चले महाकुंभ  - पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश

https://sarasach.com/?p=373

चलो करें तैयारी महाकुंभ की,
प्रयागराज को जाना है। 
पग पग संत समागम,
चरणों में शीश झुकाना है।।

बारह पूर्ण कुंभ के बाद,
महाकुंभ जब आया। 
एक सौ चबालीस वर्ष पर्यंत,
अमृत वर्षा का फल पाया।।

ऋषि मुनि गंधर्व देव, 
सब प्रयाग की ओर चले।
कृपा हुई ईश्वर की जिन पर, 
इन सबसे वह आन मिले।।

गंगा जमुना सरस्वती संगम 
करने स्नान जाना है। 
पग पग संत समागम,
चरणों में शीश झुकाना है।। 

समुद्र मंथन की नवरत्नों से, 
गिरी थी बूंदे सुधा की।
प्रयाग हरिद्वार नासिक उज्जैन
महिमा अनंत पावन धरा की।।

लेकर डुबकी महाकुंभ में, 
पुण्य लाभ कमाना है। 
गूंज रही जहां मंत्र ऋचाएं,
जीवन सफल बनाना है।।

चलो करें तैयारी महाकुंभ की, 
प्रयागराज जाना है।
पग पग पर संत समागम 
चरणों में शीश झुकाना है।।

@पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश

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