नारी -- पदमा तिवारी
नारी तुम हो नारायणी
हिंदू संस्कृति को अक्षुण्य बनाया है
संस्कृति के पौधों को
सीच-सीच प्राणों को चढ़ाया है।।
रहती हो सदा समर्पित
हर पल अपने कर्तव्यों पर
रखती लाज दोनों कुलों की
न उठे उंगली मात-पिता पर ।।
करुणामयी हो ममतामयी
स्वभाव का यही श्रृंगार है
वाणी से रखती प्रसन्न
देती सबको प्यार है।।
होती करुणा स्वभाव में पर
काली भी तुम कहलाती
निर्दोष होने पर होता प्रहार जब
खुद को नहीं रोक पाती।।
अकथनीय है नारी शक्ति
ब्रह्मा भी नहीं जान पाए
हो अज्ञेया अनंता एका और ने का
हम शक्ति है नहीं पहचान पाए।।
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पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश

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