महिला आरक्षण बिल - Dr. Pro. Y. Kasturi Bai
महिला आरक्षण बिल
सिर्फ कागज़ की स्याही नहीं,
यह वर्षों की चुप्पी का उत्तर है—
जब संसद के गलियारों में
आवाज़ें थीं, पर आधी अधूरी।
समानता का अर्थ
सिर्फ बराबरी का शब्द नहीं,
यह उस बेटी की मुस्कान है
जो स्कूल से लौटकर कहती है—
“माँ, अब मैं भी नेता बन सकती हूँ,”
और उसकी आँखों में
नए सपनों का उजाला जगता है।
न्याय तब होता है
जब रसोई और संसद के बीच
दीवारें गिरती हैं,
और भागीदारी तब जन्म लेती है
जब हाथ सिर्फ चूल्हे तक सीमित नहीं रहते,
बल्कि निर्णयों की मेज तक पहुँचते हैं।
अधिकार कोई दान नहीं,
यह जन्मसिद्ध धड़कन है—
जैसे खेत में काम करती वह स्त्री
जिसने कभी अपना नाम वोटर सूची में नहीं देखा,
अब अपनी पहचान खुद लिखती है,
और अपने बच्चों को
समान भविष्य का सपना दिखाती है।
विकास का चेहरा तब सुंदर होता है
जब उसमें हर रंग शामिल हो,
जब पंचायत की चौपाल से लेकर
संसद के ऊँचे मंच तक
महिलाओं की उपस्थिति
सिर्फ संख्या नहीं, शक्ति बनती है।
यह आरक्षण
कमज़ोरी की बैसाखी नहीं,
बल्कि अवसर का द्वार है—
जहाँ अनुभवहीन हाथ भी
नए इतिहास गढ़ सकते हैं,
और समाज को नई दिशा दे सकते हैं।
और तब समाज स्वस्थ होगा,
जब सम्मान किसी एक का विशेषाधिकार नहीं,
बल्कि हर स्त्री की स्वाभाविक पहचान होगा—
जहाँ वह सिर उठाकर कह सके,
“मैं भी इस देश की दिशा हूँ।”
Dr. Pro. Y. Kasturi Bai
Bengaluru
Karnataka

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