सच्ची क़ुरबानी - सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
क़ुरबानी
सिर्फ किसी जीव की नहीं होती,
कई बार
मनुष्य को
अपने भीतर के
अहंकार की भी बली देनी पड़ती है।
त्याग वही है
जो किसी और के जीवन में
सुकून भर दे।
यदि पूजा से
करुणा समाप्त हो जाए,
तो वह आस्था नहीं,
सिर्फ परंपरा रह जाती है।
सच्ची आहुति
हिंसा की नहीं,
स्वार्थ की होनी चाहिए।
क्योंकि
ईश्वर को रक्त नहीं,
मनुष्य का निर्मल हृदय
अधिक प्रिय होता है।
— सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
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रचनाकार : सुरेंद्र कल्याण ‘बुटाना’
करनाल, हरियाणा
मौलिकता प्रमाण-पत्र :मैं प्रमाणित करता हूँ कि प्रस्तुत रचना पूर्णतः मेरी मौलिक, स्वरचित एवं अप्रकाशित रचना है। यह किसी अन्य स्रोत से प्रतिलिपि नहीं की गई है तथा इससे संबंधित समस्त उत्तरदायित्व मेरा स्वयं का होगा।
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