बेरोज़गारी - डा, तरूण राय कागा
आज कल का जवान इधर-उधर भटक रहा,
रोज़गार की तलाश में इधर-उधर भटक रहा।
तालीम-याफ्ता बन खाता दर-दर की ठोकरें ,
रोज़ी रोटी कपड़ा की खोज में अटक रहा।
इश्तहार को टटोल कर नाउम्मीद हो जाता बेकस,
हर किसी दफ़्तर में अपना सिर पटक रहा।
सियासत-दानों के बहकावे में आकर करता हुड़दंग,
नतीजा निकला नहीं लड़ाई लफड़ा में लटक रहा।
जोश जुनून जल्वा जज़्बा सातवें आसमान पर कागा,
हुकूमत की हिमायत नहीं आंखों में खटक रहा।
डा, तरूण राय कागा
पूर्व विधायक
कवि साहित्यकार
Rajasthan
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