'क्यों' का वार, जीतो सारा संसार - जौली अंकल
इस खूबसूरत सी दुनिया में अभी तक ऐसा कोई भी महान सूरमा पैदा नहीं हुआ है जिसके जीवन में कोई समस्या टेंशन या दुखड़ा न हो। अगर आज के दौर में कोई इंसान पूरी बत्तीसी दिखाकर मुस्कुराते हुए आपसे कहता है कि उसे कोई तनाव नहीं है तो तुरंत समझ लीजिए या तो वह सफेद झूठ बोल रहा है या फिर उसका मानसिक संतुलन इस दुनिया के सांसारिक हिसाब किताब से बहुत ऊपर उठकर सीधे मोक्ष की तरफ प्रस्थान कर चुका है। आज हर व्यक्ति अपनी समस्याओं का कोई परमानेंट इलाज ढूंढ रहा है। एक सीधा सा दुनिया का गणित हम सब जानते हैं कि इस दुनिया में लाखों करोड़ों ताले रोज़ बनाए जाते हैं लेकिन कोई भी ताला बनाने से पहले उसकी चाबी का नक्शा पहले ही तैयार कर लिया जाता है। कुदरत भी बड़ी चालाक है वह परेशानी रूपी मेहमान को बाद में भेजती है और उसका स्वागत करने के लिए समाधान की मिठाई पहले ही रचकर बैठ जाती है। किसी भी समस्या का बड़े स्तर का हल ढूंढने के लिए हमें नासा के किसी बहुत बड़े वैज्ञानिक को बुलाने की ज़रूरत नहीं होती बल्कि खुद अपने साथ एक कप चाय लेकर शांत होकर विचार करने की ज़रूरत होती है।
समस्या चाहे एक आम इंसान की हो किसी बड़ी कंपनी की हो या खुद सरकार की उसका बड़ा हल ढूंढने के लिए किसी फिल्मी बाहुबली की तरह छाती पीटना या शक्तिशाली होना कतई ज़रूरी नहीं होता। अगर आप हथौड़े से ताला तोड़ने की कोशिश करेंगे तो सिर्फ ताला टूटेगा और आपका कीमती समय बर्बाद होगा जबकि ठंडे दिमाग से जेब में हाथ डालकर सही चाबी ढूंढना ही असली और सच्ची समझदारी है। आज अगर हम एक नए नज़रिए से देखें तो हमारे देश का सबसे ज़्यादा पढ़ा लिखा और बहुत सारी डिग्रियों वाला युवा ही सबसे ज़्यादा दुखी हैरान और सोशल मीडिया पर परेशान घूम रहा है। उसके मन के भीतर चारों तरफ निराशा की ऐसी गहरी धुंध भरी हुई है जैसे सर्दियों का भारी कोहरा हो और उसका खुद पर से विश्वास लगातार कमज़ोर होता जा रहा है। हर कोई स्ट्रेस एंग्जायटी और डिप्रेशन की खतरनाक दलदल में इस कद्र मजे से धंसता जा रहा है जैसे यह कोई स्विट्जरलैंड का फाइव स्टार रिसॉर्ट हो जहाँ मुफ्त की वाई फाई मिल रही हो। आज सब कुछ होते हुए भी हम अपनी आने वाली इस बेहद होनहार नई पीढ़ी को सिर्फ और सिर्फ डिजिटल तनाव तथा खोखली प्रतियोगिता का सूप परोस रहे हैं।
हमारे युवा आजकल इस बात से सबसे ज़्यादा परेशान हैं कि जो कुछ वे रात दिन चाहते हैं वह उन्हें तुरंत क्यों नहीं मिल रहा है। जैसा रील्स या इंस्टाग्राम वाला शानदार वीआईपी जीवन वे जीना चाहते हैं वैसा असलियत में क्यों नहीं जी पा रहे हैं। देश समाज और पर्सनल लाइफ की बड़ी बड़ी समस्याएं भी अपनी जगह से टस से मस नहीं हो रही हैं। इन सभी का एक ही अचूक बेहद किफायती और जादुई हल है जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे कि ऐसा कौन सा अचूक फॉर्मूला है जो दुनिया की सभी समस्याओं को पल भर में गायब कर सकता है। वह जादू कोई बहुत बड़ा वैज्ञानिक ग्रंथ नहीं बल्कि वर्णमाला का एक छोटा सा बेहद शक्तिशाली मंत्र है जिसे हम सब क्यों यानी वाई कहते हैं। बात चाहे पैसा कमाने की हो कॉर्पोरेट कामयाबी पाने की हो या फिर अपनी ज़िंदगी को सचमुच खुशहाल और शांतिपूर्ण बनाने की हो एक बार गहराई से बड़े स्तर पर सोचिए कि जो कुछ हम चाहते हैं वह अगर नहीं हो रहा है तो आखिर क्यों नहीं हो रहा है। अगर आप एक बार शांत मन से बैठकर इस क्यों की असली जड़ यानी असली कारण ढूंढ पाए तो जीवन की हर छोटी बड़ी परेशानी का ताला अपने आप एक जादुई क्लिक के साथ खुल जाएगा।
अंत में दुनिया भर के सभी प्यारे दोस्तों और विशेषकर हमारे समझदार युवाओं को जौली अंकल की ओर से एक सीधा सच्चा और बिना बनावट वाला सोशल मैसेज है कि अपनी अनमोल ज़िंदगी को सोशल मीडिया के खोखले दिखावे में नहीं बल्कि असली और ओरिजिनल खुशी से जीने में ही सबसे बड़ी समझदारी है। आजकल लोग पड़ोसियों और दूसरों को जलाने के चक्कर में अपनी खुद की प्यारी और असली मुस्कान को दांव पर लगा रहे हैं। इस फालतू की टेंशन को अपने आलीशान दिमाग का परमानेंट और बिना किराया देने वाला किराएदार मत बनाइए बल्कि इसे एक प्यारी सी मुस्कान के साथ मुस्कुराकर टाटा बाय-बाय कह दीजिए। जब भी जीवन में कोई बहुत बड़ी समस्या आपके सामने आकर सीना तानकर खड़ी हो जाए तो डरने के बजाय अपनी कॉलर खड़ी कीजिए और मुस्कुराकर सीधे उसकी आँखों में आँखें डालकर पूछिए कि मैडम तुम यहाँ क्यों आई हो। हमेशा याद रखिए कि दुनिया की कोई भी समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न हो वह आपकी मुफ्त वाली बेहद खूबसूरत और अनमोल मुस्कान से बड़ी कभी नहीं हो सकती। हमेशा हरदम खुशियाँ मनाइए दिखावा कम कीजिए और इस बात को अपने दिलो दिमाग में पक्का लॉक कर लीजिए कि जो इंसान सही समय पर सही जगह ‘क्यों’ का अचूक वार करना सीख जाता है वह बिना किसी हथियार के पूरे संसार को बहुत ही आसानी से जीत सकता है।
- जौली अंकल
Delhi

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