अकेला व्यक्ति - संगीता अहलावत
किसी का किसी का साथ देना सहयोग होता है l कोई भी व्यक्ति इस समाज में अकेले जीवन निर्वाह नहीं कर सकता है l सभी को एक दूसरे की आवश्यकता है, एक दूसरे के बिना वह बिल्कुल अकेला है l समाज में अधिकतर कार्य मिल- जुलकर ही पूरा कर सकते हैं l अकेला व्यक्ति किसी भी इमारत को अकेला नहीं बना सकता है l कोई भी कंपनी अकेले के दम पर नहीं चल सकती है और तो और कोई भी सरकार बिना सहयोग के राष्ट्र के लिए जन हित कार्य नहीं कर सकती है l सहयोग को प्राथमिकता इसलिए दी जाती है क्योंकि सहयोग से हर कार्य सरल हो जाता है l
सहयोग की भावना परिवार में ही सबसे पहले विकसित होती है l परिवार में सभी एक दूसरे के कार्यों में हाथ बंटाते हैं l
घर के कार्यों को सभी मिलजुलकर पूरा करते हैं l ऐसे ही विद्यालय में बच्चे एक दूसरे की पढ़ाई में मदद करते हैं l सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेलकूद , प्रतियोगिताओं, अन्य गतिविधियों को मिलकर करते हैं l नौकरी हो या व्यवसाय हो सभी में एक दूसरे के सहयोग से कार्य पूरे होते हैं l सामाजिकता, राजनीति, शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण, कृषि , सड़क बनाना, मकान बनाना, पुल बनाना, देश की सीमा पर फौजी भाइयों का योगदान सभी केवल सहयोग से संभव है l
सहयोग से जीवन में हर सफलता आसानी से मिल जाती है l सहयोग से शांति मिलती है, उन्नति होती है l सहयोग ही राष्ट्र की समृद्धि है l
स्वामी विवेकानंद ने भी सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया है l
अंत में सहयोग से ही किसी भी कार्य की सफलता संभव है l
-संगीता अहलावत
उत्तर प्रदेश

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