Tuesday, 14 July 2026

दान ना कर सके तो क्या फायदा - जितेन्द्र टेलर (जीत)



दान ना कर सके तो क्या फायदा - जितेन्द्र टेलर (जीत) 

जिंदगी में कमायें हो लाखो मगर, दान ना कर सके तो क्या फायदा ।
जो मिला है एक दिन वो लूट जाएगा, कुदरत का रहा है यहीं कायदा ।

सीखों सागर बादल और नदियां से, पाकर जल, जल सब में बांटना ।
सीखों पर्वत शिखर भ्रंश घाटियों से, मानव के लिए स्वयं को पाटना ।
सीखों पेड़ो के फूल पत्ती और शाख से, अंग परहित उपकार में काटना ।
सीखों चोंच भरें दाना पक्षियों से, धन ज़रूरत से हो ज़्यादा तो त्यागना ।
सदियों से है समर्पित समष्टि लिए, संकुचन भाव आया न यदा कदा ।

अपने अन्न और धन का करके दान, भूख प्यास किसी मिटाओ तुम ।
अपने भूज बल के तेज प्रताप से, दुष्ट से दीन दुखी को बचाओ तुम ।
पथ अंधेरे व अज्ञान जो अग्रसर, उनके मध्य दीप ज्ञान जलाओ तुम ।
अपने श्रमकण उज्ज्वल मौक्तिक से, धरती मां को फिर सजाओं तुम ।
प्रेम करूणा शरण ज्ञान क्षमा का भी, रहो दान करते जगत में सदा ।

ईश्वर का है आशीष तुम पर की, दान का मिला तुमको अधिकार है ।
सुख के सागर से तुम हीरे मोती लिए, धन वैभव भरा एक संसार है ।
धन संचित तेरे कर्मफल से जो है, वह किसी की खुशी का आधार है ।
दान दो मानव को समझ मानव, न बढ़े जिससे फिर मन अहंकार है ।
ग्रंथ वेद पुराणों में लिखा यही, दान से दाता की बढ़ती सुख संपदा ।

दान भाव मानव के अतंस में, विश्व कल्याण का है सशक्त प्रमाण ।
दान के पात्र अपेक्षित जन की, दानी को रखनी होगी कोई पहचान ।
ध्येय हो दान से दीन और देश का, नितप्रति ही रहे होता कल्याण ।
न की बंद आंखों से लुटाकर धन, कर दो शैतान को महा बलवान ।
दान अमृत बूंद सा बन दे जीवन, दान से है हो जाती खड़ी आपदा ।

जितेन्द्र टेलर (जीत) 

राजस्थान 

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