Tuesday, 14 July 2026

दान की ओट - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"

 


दान की ओट - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"

चंदे की थाली लेकर जब,

कुछ चेहरे मुस्काते हैं,

सेवा के मीठे नारों से,

सपनों को बहलाते हैं।

दान समझकर जो सौंपा था,

वह विश्वास का अंश था,

पर चोरी की काली छाया में,

टूट गया हर हर्ष था।

योगदान था जनता का,

आशा की हर साँस थी,

घोटालों की आग लगी तो,

जल उठी हर आस थी।

भेंट अगर ईमान की हो,

तो मंदिर भी मुस्काता है,

पुण्य तभी फलता जग में,

जब मन निर्मल हो जाता है।

सेवा का अर्थ दिखावा नहीं,

न सत्ता का व्यापार बने,

मानवता की हर धड़कन में,

करुणा का संसार बने।

आओ ऐसा युग रचें,

जहाँ विश्वास न बिक पाए,

चंदा पहुँचे ज़रूरतमंद तक,

कोई अधिकार न लुट पाए।

दान नहीं है धन का केवल,

मन का उजला व्यवहार है,

सहयोग ही वह शक्ति है,

जिससे रोशन हर परिवार है।


डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"

पंजाब 

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