धरना और प्रदर्शन - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
सड़कों पर जब शोर मचता है,
जन-जन का मन बोल उठता है।
धरना, प्रदर्शन, विरोध की ज्वाला,
अन्याय के विरुद्ध बनती मशाल।
भूख हड़ताल का कठिन तप है,
सत्य और साहस का यह स्वरूप है।
प्रदर्शनकारी जब आगे आते,
अपने अधिकारों की बात सुनाते।
माँगें लेकर जनता खड़ी है,
आशा की डोर अभी जुड़ी है।
बहिष्कार का भी होता आह्वान,
जब टूटने लगता जन का सम्मान।
कभी समझौता राह दिखाता,
तो कभी संघर्ष जीत दिलाता।
"बंद" की पीड़ा सब सहते हैं,
फिर भी सपने नए गढ़ते हैं।
लोकतंत्र की यही कहानी,
जनता ही इसकी असली रानी।
आवाज़ उठे तो संयम रखना,
सत्य और न्याय का दीपक जलाना।
डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
पंजाब

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