Wednesday, 15 July 2026

दानी बालक - सुषमा खजूरिया



दानी बालक - सुषमा खजूरिया

चंदा इकट्ठा हुआ गली-गली में,  
बच्चों ने भी दिया अपना दान।  
छोटे-छोटे हाथों का सहयोग था,  
हर घर का था इसमें योगदान।।

किसी ने दी भेंट मिट्टी की,  
किसी ने की राम की सेवा।  
नोट नहीं, भाव थे सच्चे,  
यही था सबसे बड़ा पुण्य मेवा।।

रास्ते में कुछ लोग मिले ऐसे,  
करना चाहते थे चोरी का खेल।  
कुछ ने सोचा घोटाला कर लें,  
पर जनता ने कर दिया फेल।।

अब अयोध्या में घंटियां बजतीं,  
सरयू की लहरें गीत सुनातीं।  
भ्रष्टाचार हारा, श्रद्धा जीती,  
राम मंदिर की दीवारें बतातीं।।

राम हम सबके हैं  
ना कोई छोटा, ना कोई बड़ा।  
चंदे से लेकर सेवा तक,  
सबका सपना हुआ खड़ा।।

सुषमा खजूरिया 
हिमाचल प्रदेश 

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