‘काव्य कदम’ के मासिक कवि सम्मेलन में सजी साहित्यिक संध्या
सारा सच (चंडीगढ़) 25 जुलाई। हरियाणा की साहित्यिक संस्था ‘काव्य कदम’ द्वारा आयोजित मासिक कवि सम्मेलन सेक्टर-17 स्थित टी.एस. सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी, चंडीगढ़ में संस्था के अध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ की अध्यक्षता में गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. हर्ष शर्मा (ढकोली) रहीं। मंच संचालन शायर संदीप भगवाड़िया ‘संवेदी’ ने प्रभावशाली एवं रोचक शैली में किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन तथा कवयित्रियों द्वारा गाए गए मधुर स्वागत गीत से हुआ।
काव्यपाठ का श्रीगणेश राजीव गुप्ता जी ने अपनी गज़ल “ज़िंदगी में नहीं कुछ तुम्हारे बिना, हर शै बेमानी तुम्हारे बिना” सुनाकर किया। अध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ ने “आज के इंसान को क्या हो गया, जगने से ज़्यादा देखो ये सो गया” सुनाकर वर्तमान सामाजिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया। वरिष्ठ कवि वीरेंद्र राय ने “माना कि लबों से वो इज़हार नहीं करता, ये झूठ सरासर है वो प्यार नहीं करता” सुनाकर महफ़िल को ग़ज़लों की ख़ुशबू से सराबोर कर दिया। ग़ज़लकार राजन तेजी ‘सुदामा’ ने अपनी ग़ज़ल “बस बहारों का क्या पता पूछा, मुस्कुरा कर गुज़र गया मौसम” कही जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
युवा कवयित्री करिश्मा वर्मा ने देशभक्ति से ओतप्रोत रचना “बलिदान तुम्हारा कोई मिटा नहीं सकता, धरती माँ पर कोई नज़र उठा नहीं सकता” सुनाकर राष्ट्रप्रेम का भाव जगाया। प्रभात पाण्डेय ने “मौन हुई है नीति विदुर की, भीष्म हुए हैं फिर निर्बल, लाज लुटी है द्रोपदी की, फिर फलित हुआ दुर्योधन का छल” के माध्यम से समकालीन सामाजिक परिस्थितियों पर सशक्त प्रहार किया। हास्य कवि अश्वनी मल्होत्रा ‘भीम’ ने “पत्नी में आधा अक्षर कम होता है, पर उसमें पुलिस से ज़्यादा दम होता है” सुनाकर श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।
ममता ग्रोवर ने “जब कच्ची संकरी गलियाँ थीं मेरे गाँव की, महफ़िलें बाकमाल थीं पीपल की छाँव की” के माध्यम से गाँव की स्मृतियों को जीवंत किया। कीर्ति सोनी ने “मैं सुखनवर तो नहीं, मगर कुछ लिख-कह लेती हूँ…” में अपने भावों को सहज अभिव्यक्ति दी। रवि कटारिया ने “नाम तेरा यह जपते हैं, फिर भी पाप यह करते हैं” सुनाकर श्रोताओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।
राम कुमार वर्मा ‘राम’ ने “जब से उसने लिया पता मेरा, मुझमें बाकी न कुछ बचा मेरा” ग़ज़ल प्रस्तुत कर श्रोताओं का खूब स्नेह प्राप्त किया। जया सूद ने “मेरी कलम ने ली आज खुलकर अंगड़ाई, दिल के उत्सव से करेगी रोशन आज यह अंगनाई” तथा मीना जागलान ने “तुम पास होते हो दिल को सुकून-सा मिलता है, तुम्हारी एक मुस्कान से मेरा हर ग़म खिलता है” सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। डॉ. मेजर मंजु चावला ने अपनी नज़्म “कोई भी पहला प्यार आख़िरी प्यार नहीं होता, उसी से या किसी और से प्यार बार-बार होता है” प्रस्तुत की। राकेश कुमार ‘रसिक’ ने “अजब-सा हाल हो गया है यार अब तो ज़माने का, सिलसिला थम नहीं रहा किसी को नीचा दिखाने का” के माध्यम से सामाजिक मानसिकता पर करारा व्यंग्य किया।
स्मृति शर्मा ने “उजालों में भी मुझको तीरगी महसूस होती है, कि दिल को जब तुम्हारी तिश्नगी महसूस होती है” ग़ज़ल से श्रोताओं का मन मोह लिया। सुरेंद्र पाल सोनी ‘काकड़ौद’ ने “हर रोज़ किसी को लील रहा है, न जाने कितनों को निगलेगा, नशा कलयुग का बकासुर घर-घर से भोजन निकलेगा” के माध्यम से नशे के विरुद्ध प्रभावशाली संदेश दिया। मंच संचालक संदीप भगवाड़िया ‘संवेदी’ ने “कभी मुस्कुरा कर इधर देखते हो, नज़र क्यों चुरा कर मगर देखते हो” सुनाकर भरपूर दाद बटोरी।
अनीता नरवाल ने “देखा हमने मैदाँ में ऐसा इक नज़ारा है, जीत जिसकी पक्की थी बस वही तो हारा है” ग़ज़ल सुनाई। निशा गर्ग ‘दीपक्षम’ ने युवाओं की पीड़ा को स्वर देते हुए “क्यों ये नौजवान रातों की नींद हराम करते हैं…” प्रस्तुत की। निर्मल सूद ने “दहलीज़ केवल घर और बाहर की संधि रेखा नहीं, घर के संस्कार-व्यवहार का पूरा संसार है” जैसी विचारोत्तेजक रचना सुनाई। सीमा चहल पुष्प ने पतियों पर हास्य रचना सुनाकर पूरे सभागार को ठहाकों से गूँजा दिया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण चाँदनी शर्मा की लघुकथा ‘वेटिंग रूम की रात’ रही, जिसमें उन्होंने संवेदनशीलता के साथ यह संदेश दिया कि कई बार कुछ मुलाकातें मंज़िल तक साथ निभाने के लिए नहीं, बल्कि हमें स्वयं तक वापस पहुँचाने के लिए होती हैं। सुरिन्द्र कुमार सोइन ने “हम हैं भारत की वीर बेटियाँ, हम बढ़ रही हैं आगे ही आगे” प्रस्तुत कर नारी शक्ति का प्रभावशाली चित्रण किया। डॉ अनुपमा हेमा जी ने बहुत सुंदर रचना सुनायी - कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन।
मुख्य अतिथि प्रेम विज ने खूबसूरत ग़ज़ल ‘मन मंदिर में आकर देखो, अपना मुझे बनाकर देखो’ पेश की और संबोधन में कहा कि साहित्य समाज की चेतना का दर्पण है और ऐसे आयोजन नई प्रतिभाओं को निरंतर प्रोत्साहित करते हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. हर्ष शर्मा ने सभी रचनाकारों की सराहना करते हुए संस्था के सतत साहित्यिक प्रयासों की प्रशंसा की। अध्यक्षीय उद्बोधन में बलवान सिंह ‘मानव’ ने कहा कि ‘काव्य कदम’ साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संवर्धन के लिए निरंतर सक्रिय है तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से आयोजित करता रहेगा। इसके अलावा अंजू बरवड़, राजगुणपाल बालकीया, एम. एल. अरोड़ा ‘आजाद’, प्रवीण सुधाकर, आर. के. सुखन, शिवाजी चौहान बुन्देलखंडी, प्रतिभा सिंह, हरेन्द्र सिन्हा, कृष्णा मैक्स, पवन शर्मा ‘मुसाफिर’, नवल भदौरिया आदि ने भी अपनी सुंदर प्रस्तुति देकर चार चांँद लगा दिए।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, रचनाकारों, साहित्यप्रेमियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया गया। विविध रसों—श्रृंगार, वीर, करुण, हास्य, व्यंग्य, सामाजिक सरोकार और आध्यात्मिक भावों—से सजी इस साहित्यिक संध्या ने उपस्थित श्रोताओं को देर तक मंत्रमुग्ध रखा।

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