Monday, 17 August 2026

सावन में सखीयों से बातें / सावन में सखीयों से बातें

 शीर्षक : *सावन में सखीयों से बातें*

विधा : कविता

अरी सखी सुन ना 
मेरे दिल का हाल। 
कैसे रहती हूँ मैं 
उनके बिना यहाँ। 
जब से आई छोड़कर 
माता-पिता के घर। 
जीना दूवर हो रहा
उनके बिना यहाँ पर।। 

लग रही आग सावन में
कैसे बुलाऊँ प्रीतम को। 
मन डोल रहा आज मेरा
उन्हें दिलमें बुलाने को। 
अब दिल की पीड़ा और 
नहीं सही जा रही सखी। 
बेहाल मुझे कर दिया है
उनकी मदहोश बातों ने।। 

बड़े व्रत उपवास करके 
इन्हीं सावन के दिनों में। 
करके सोहलय सोमवार
माँगा था शिव-पर्वती जी से। 
अरी सखी फिर आ गया 
वो ही सावन का महीना। 
कैसे बुलाऊँ फिर से उन्हें
इस बेचैनी को मिटाने।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई

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