*तुझे ज़िन्दगी बुला रही है*
तुझे ज़िन्दगी बुला रही है।
गीत खुशी के सुना रही है।
सुख - दुख के दो पाटो में,
सबको झूला - झूला रही है।
तुझे ज़िन्दगी बुला रही है..
हँसाती ये कभी रुलाती भी,
सपने -सुहाने दिखा रही है।
देखो - देखो आँखे खोलो,
भोर सुनहरी जगा रही है।
तुझे ज़िन्दगी बुला रही है...
सूरज की धवल रश्मियां,
दिवस नया सजा रही हैं।
नव कीर्ति नई परिभाषा,
जीना सबको सीखा रही है।
तुझे ज़िन्दगी बुला रही है...
उठ चल बंदे बढ़ता चल,
किस्मत साँकल बजा रही है।
हर द्वारे हर देहरी आँगन,
फूल कुसुमित खिला रही है।
तुझे ज़िन्दगी बुला रही है...
कर्मगति समझाती 'चन्द्रेश'
तुझे ज़िन्दगी बुला रही है
गीत खुशी के सुना रही है
ज़िन्दगी तुझको बुला रही है
तुझे ज़िन्दगी बुला रही है
चन्द्रकान्ता सिवाल 'चन्द्रेश'
(दिल्ली)
चन्द्रकान्ता सिवाल 'चन्द्रेश'

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