Tuesday, 11 August 2026

जागो विद्यार्थी जागो

शीर्षक : जागो विद्यार्थी जागो : डॉ. वै . कस्तूरी बाई 

पक्ष खड़ा है अपनी धुन में, विपक्ष अलग हुंकार करे,
 जनता रोती बीच सड़क पर, कौन यहाँ उद्धार करे?
बेशर्म चेहरों की मुस्कानों में, झूठ का मेला सजता है,
 नालायक नेतृत्व के कारण, हर सपना चुपचाप मरता है।
ज़िद्दी अहं का शोर मचा है, घमंड गगन को छूता है,
 दादागिरी की भाषा सुनकर, संविधान भी रूठा है।
झुकना यदि हो सत्य के आगे, वह तो उत्तम आचरण है,
 पर स्वार्थों के आगे झुक जाना, राष्ट्रधर्म का मरण है।
भ्रष्ट हवाएँ बहती देखो, आरोपों का जाल बिछा,
 ग़ैर क़ानूनी चालों ने फिर, न्यायालय का द्वार खटखटा।
विद्यार्थी सब देख रहे हैं, कैसी चलती राजनीति,
 जैसा बोओगे वैसा काटो, यही समय की है नीति।
जब विद्यालय से अधिक उन्हें, नारे ही आकर्षित करते,
 ज्ञानदीप फिर मंद पड़ेंगे, सपने सारे धूल बिखरते।
हड़तालों का शोर सिखाकर, यदि श्रम का मूल्य भुलाओगे,
 अनशन को ही शक्ति बताकर, कर्मपथ कहाँ दिखलाओगे?
विदेशी हित यदि राजमुकुट का, गुप्त अभिलाषा बन जाए,
 लोभ-लालच की रिश्वत पाकर, नीति कठपुतली बन जाए।
जो अपने ही देश की नैया, स्वार्थों से डुबवाते हैं,
 इतिहासों के कठोर पृष्ठ पर, वे अपराधी कहलाते हैं।
युवकों! तुम विवेक जगाना, क्रोध नहीं, निर्माण चुनो,
 सत्य, श्रम, विज्ञान, सदाचार का, उज्ज्वल पावन मार्ग चुनो।
लोकतंत्र की शक्ति यही है— मतभेद रहें, मनभेद नहीं;
 राष्ट्र प्रथम हो, दल बाद में हों, इससे बढ़कर संदेश नहीं।
आओ मिलकर प्रण दोहराएँ— देश न बिकने पाएगा,
 ईमानों का दीप जलाकर, भारत आगे जाएगा।

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