आज़ादी का स्वाभिमान / डॉ अनुपमा वर्मा
तिरंगे की शान में, भारत की पहचान में,
बसता है हिंदुस्तान हमारे अभिमान में।
जो मिली है हमें आज़ादी बलिदानों के बाद,
उसकी कीमत समझें, रखें दिल में याद।
नमन उन वीरों को, जिन्होंने हँसकर प्राण दिए,
मिट्टी की खातिर अपने अरमान दिए।
किसी ने सत्याग्रह किया, किसी ने संघर्ष किया,
किसी ने हँसते-हँसते मातृभूमि पर सर्वस्व दिया।
स्वराज का सपना था, स्वाभिमान की पुकार,
हर भारतीय के मन में था स्वतंत्रता का विचार।
बेड़ियाँ टूटीं तो सूरज नया निकला,
भारत का भाग्य फिर अपने हाथों में दिखा।
आज़ादी केवल पर्व नहीं, जिम्मेदारी भी है,
देश के प्रति हमारी एक वफादारी भी है।
नफरत की दीवारें तोड़ें, प्रेम का दीप जलाएँ,
मिलकर अपने भारत को और महान बनाएँ।
न हो भेद भाषा का, न जाति का अभिमान,
हर दिल में बस जाए भारत माँ का सम्मान।
मेहनत को पूजा मानें, सत्य को आधार बनाएँ,
अपने कर्मों से तिरंगे की शान बढ़ाएँ।
आओ स्वतंत्रता दिवस पर यह संकल्प दोहराएँ,
भारत की एकता और अखंडता को सदा निभाएँ।
आजादी की लौ कभी न होने दें कम,
भारत माता की जय से गूँज उठे हर कदम! 

जय हिंद! 

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab

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