Thursday, 13 August 2026

झुकना / कवि सुरेश कंठ

 शीर्षक —  “  झुकना “

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 न झुकती है दुनिया, 
                    झुकाने वाला चाहिए
 समझतीं है दुनिया, 
                  समझाने वाला चाहिए

 विकसित है भारत, 
                   समझने वाला चाहिए
 दुनिया में बजती डंका, 
              औरों को समझना चाहिए

ऐसे नहीं हुआ विकसित, 
          इसका रहस्य जानना चाहिए
त्याग है इसके पीछे, 
          इसपर विश्वास करना चाहिए

इसके पीछे है सही  शासन
          इसे  हमें समझ लेना चाहिए
पाक भी अब समझ चुका है
    इसे गम्भीरता से समझना चाहिए

विश्व में बजता डंका, 
            जनता को समझना चाहिए
मजबूत सरकार है  सब मुम्किन है, 
         आश्चर्य नहीं समझना चाहिए

भारत विश्वगुरु बनेगा, 
        बंगलादेश को समझना चाहिए
पाक क्यों नहीं मानता, 
                उसे समझा देना चाहिए

भारतीय अब समझ गया है, 
               नित्य-दिन बढ़ना चाहिए
चमगादड़ चीन समझ गया, 
          बेमतलब लड़ना नहीं चाहिए

देश के अंदर भी दुसमन हैं, 
           उसे भी समझ लेना चाहिए
उसका भी अंत निश्चित है, 
                यह समझ लेना चाहिए

“ झुकना “ कभी सीखा नहीं 
       विपक्ष को समझ लेना चाहिए 
तीनों सेना मजबूत है काफी 
        दुश्मन को समझ लेना चाहिए

दुश्मनी भी शान से निभाते हैं 
      उन्हें भी यह समझ लेना चाहिए 
हमें एक मुस्कान ही काफी है 
       पल में उसे समझ लेना चाहिए 
                 जयहिंद 
                  *****
रचयिता - काव्य शिरोमणि वरिष्ठ
               “ कवि सुरेश कंठ “
                 अररिया, बिहार।

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