ग़ज़ल
प्रतियोगिता का बिषय--सावन
चलो घूमें हिमाचल में प्रकृति ने मन लुभाया है।
तुम्हारा साथ पा करके खिला दिल मुस्कराया है।।
न सोचा था कभी हम इस क़दर दिल हार बैठेंगे,
कि हमने यार की ख़ातिर क़सम से दिल बिछाया है।
हवाओ ठहर जाना तुम बड़ा नाजुक नया मसला,
महक जाना मिरे दिल में मिरा महबूब आया है।
सुहाना हो गया मौसम कि बरसा झूम कर सावन,
नशीली ऑंख का कजरा घटाओं ने चुराया है।
अभी तो शाम बाकी है ज़रा बैठो "कमल" मेरे,
न रोको आज तुम मुझको तुम्हें अपना बनाया है।
स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद- हरियाणा

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