Friday, 14 August 2026

काँवड़ की राह / डॉ अनुपमा वर्मा

 काँवड़ की राह / डॉ अनुपमा वर्मा

सावन आया, गंगाजल लाया,
भक्ति का संदेश सुनाया।
काँधे पर काँवड़, मन में शिव,
हर कदम ने विश्वास जगाया।
हर-हर महादेव की गूँज में,
श्रद्धा का संसार सजा है,
जल की हर बूँद में भक्तों ने,
भोले का आशीष रचा है।
पर भक्ति का अर्थ यही तो है—
मन में शांति, हृदय में प्यार,
नशा, उपद्रव छोड़कर चलना,
यात्रा बने सद्भाव का द्वार।
जल लाएँ तो जल बचाएँ,
गंगा को भी निर्मल रखें,
जिस जल से शिव का जलाभिषेक,
उस जल की कीमत भी समझें।
व्यवस्था भी ऐसी हो सुंदर,
यात्री को सम्मान मिले,
सेवा, सुरक्षा और अनुशासन से,
हर पथ को आसान मिले।
काँवड़ केवल काँधे पर नहीं,
काँवड़ मन में भी उठानी है,
अहंकार, क्रोध और नशे की जगह,
करुणा भीतर बसानी है।
शिव को जल चढ़ाने वालों,
शिव का संदेश भी याद करो
शांति रखो, संयम रखो,
मानवता का सम्मान करो।
गंगाजल की एक-एक बूँद,
जीवन का आधार बने,
भक्ति ऐसी हो कि इस सावन,
हर दिल में उजियार बने।
हर-हर महादेव की ध्वनि हो,
पर किसी का दिल न दुखे;
यात्रा ऐसी पावन हो कि,
इंसानियत भी साथ चले।

डॉ अनुपमा वर्मा " हेमा "
पंजाब 

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