Friday, 7 August 2026

शीर्षक-ज़िन्दगी

                                                                               ग़ज़ल

शीर्षक-ज़िन्दगी

 ज़िंदगी की राह भी आसान होती जायगी। 
जान मेरी आपके कुर्बान होती जायगी‌।। 

साथ मेरे दो कदम चल के जि देखो जानजाॅ, 
नींद ऑंखों से तिरी अनजान होती जायगी।। 

डूब कर ऑंखों मि तेरी तरवतर हो जायगी, 
सच कहूँ तो ज़िंदगी  मुस्कान होती जायगी।। 

क्या बताएं हम किसी को दिल्लगी क्या चीज़ है, 
आशिकों से तुम पूछो हैरान होती जायगी।। 

दिल कि धड़कन में बसाया है तुम्हें हमने "कमल"
दिल लगा कर देख लो पहचान होती जायगी।। 

स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद -हरियाणा

No comments:

Post a Comment