।। जीवन की सीख।।
था घना अंधेरा,
घोर घटा भी छाई थी।
पथ थी कहीं पथरीली,
कही गहरी खाई थी।।
भय भी हृदय में,
हिलोरे लेते ऊपर नीचे।
हम दोनों बढ़ चले,
निर्भय आंखें मीचे।।
पहली बार मृत्यु का,
देखा तांडव नर्तन।
हलक में अटकी थी प्राण,
करते मुख हरि कीर्तन।।
भूत प्रेत से ज्यादा,
दो टंगे दैत्य का भय था।
ऊपर बिजलियां भी डराती,
पथ पर जोखिम अतिशय था।।
मेघ अनवरत बरस रहे थे,
पथ पर बहती मानो गागर।
भय को बना साहस ,
बढ़ता गया मृत्यु के ऊपर।।
किंतु सवाल लक्ष्य का था,
सो निर्भय बढ़ चला।
गढ़ने भविष्य की इमारत,
मृत्यु से भी लड़ चला।।
जब मनुष्य लक्ष्य की ,
लेता है जिद्द ठान।
तब डिगा न पाता कंटक,
बाधा,आंधी या तुफान।।
हे रुप ! जीवन की सीख,
सतत यही अपना लेना।
शिव समान शांत प्रसन्न,
विषधर को भी मित्र बना लेना।
रचना:रुपेश कुमार मिश्र
ग्राम पोस्ट- भद्रेश्वर, वार्ड 06 ,
वाया- बथनाहा, प्रखंड - फारबिसगंज,
जिला -अररिया , बिहार, पिन -854316 ,
मोबाइल+ व्हाट्सएप्प - 09801546664, 08292600169
Rupesh Kumar Mishra
S/o- Shree Dinesh Mishra
At post -Bhadreswar,ward 06,
Via - Bathnaha,block -Forbesganj
Dist -Araria, Bihar, pin -854316
Mo.09801546664,08292600169

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