शरीर / अनीता चमोली
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हमारा शरीर ईश्वर निर्मित प्रकृति का उपहार है।
जो मिलता है हमे हमारे माता पिता से।
जिसका धर्म से कोई लेना देना नहीं l
फिर हम क्यो बट गये हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई मे।
जब ये जमीं बनी तो धर्म नही था बस एक दिल था शरीर मे
जो धडकता रहा होगा हर एक के लिये क्योंकि उसमे जिंदा रही होगी इंसानियत।
आज न इंसानियत है न धर्म का ज्ञान।
बस एक शरीर है जिसने जहाँ जन्म लिया वो उसी धर्म का हो गया।
जबकि उसे ज्ञात ही नही धर्म रूपी इंसानियत का।
बन रहे है धार्मिक चल रहे है बिना कुछ जाने उसके नियमों को
और लड रहे है आपस मे क्योंकि शरीर पाया है सबने अपने अपने धर्म मे।
आधुनिक संस्कार विहीन समाज मे आज धर्म की पहचान सिर्फ शरीर है सिर्फ शरीर।
अनीता चमोली "अनू"
देहरादून (उत्तराखंड)
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