Thursday, 17 September 2026

मृत्यु - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 

मृत्यु - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त 
जबलपुर मध्यप्रदेश 
कविता... मृत्यु

जीवन मृत्यु अटल सत्य है
एक दिन सबकी होनी है ।
जिसका जन्म यहां हुआ है
एक दिन मृत्यु भी होनी है ।

जीवन में संघर्ष यहां है
सुख दुख आते जाते है ।
जीवन और मृत्यु के बीच मेंं
संघर्ष मय जीवन जीते है ।

कोई यहां कुछ नही लाया है
न कुछ लेकर ही, जायेगा ।
खाली हाथ ही सब आये हैंं
सारा सच खाली हाथ जायेगा ।

कोई गरीब न कोई अमीर है
कर्म का फल सबको मिलता है ।
सारा सच है जैसा जो करेगा
फल भी वैसा ही मिलता है  ।

जीवन की इस मोह माया में
यहां सभी ,भटकते रहते है ।
ये तेरा है वो मेरा है यही तो
इन्सान  बस सोचते रहते हैं ।

बचपन और युवापन मेंं
खेले कूंदे और जवान हुये ।
बीती जवानी मौज मस्ती में
 बुढ़ापे को देख घबड़ा गये ।

संघर्ष भरे इस जीवन में
सारा सच ईश्वर को भूल गये ।
जिसने उसको याद किया
जीवन से मोक्ष, भी पा गये ।

जीवन मिला है कुछ कर लो
मोक्ष उसी से मिल पायेगा ।
सच्चाई के मार्ग पर चलकर
मंजिल अपनी भी पायेगा ।

धर्म कर्म कुछ अच्छे कर लो
ईश्वर से कुछ नाता जोड़ लो ।
नैया पार वो सभी की लगाते
पूजा भजन ईश्वर की कर लो ।

बड़े भाग्य से मानुष तन पाया है
जीवन में कुछ पुण्य भी कर लो
पाप पुण्य का मतलब समझकर 
जीवन की नैया को पार लगा लो।

माता पिता की सेवा करना
मान सम्मान उनका भी करना ।
सारा सच मृत्यु सभी की होना है
वो दिन सभी एक दिन आना है ।

पल बढ़े तिल घंटे मृत्यु 
अपने समय पर ही होना है।
डाक्टर कितनी भी कोशिश करें 
मृत्यु समय पर होना है ।
माता पिता जन्म दाता है
तिरस्कार उनका न करना ।
माता पिता ने सेवा जो की है
उस सेवा को भूल न जाना ।

मृत्यु अपने समय पर आती है
कोई भी बचा नही पाता है।
सारा सच है मिट्टी के शरीर को
शमशान में जला दिया जाता है।

महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
   जबलपुर म प्र 

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