Sunday, 21 June 2026

मंहगाई - डां अनन्तराम चौबे अनन्त

राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी 
साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
मंहगाई - डां अनन्तराम चौबे अनन्त

नेता मंत्री उद्योगपतियों 
अफसरों को मंहगाई से
इनको क्या लेना-देना है
इन सबके पास खजाना है।

सारा सच आम जनता पर  
ही मंहगाई की मार पड़ी है ।
बाजार में देखो हर वस्तु के 
दामों की कैसी होड़ मची है ।

स्कूलों में देखो बच्चों का
बस्ता किताब कितना भारी है  ।
फीस तो इतनी बड़ी हुई है
स्कूलों की फीस बहुत भारी है।

मंहगाई की मार पड़ी है
फिर भी हम झेल रहे हैं ।
गरीब और मध्यम वर्ग  तो
मुश्किल में ही जी रहे हैं ।

सारा सच मंहगाई का किस
प्रकार आंकलन किया जाय ।
गरीबी,अमीरी की तराजू पर 
किस तरह से तौला जाय ।

सारी मंहगाई गरीबों
के आसपास रहती है ।
दाल रोटी खाना भी
आज मुश्किल पड़ती है ।

मंहगाई अमीरों के कभी
आसपास नही रहती है ।
अमीरों के पास मंहगाई 
किस हक से जा सकती है ।

अमीरों के घर मंहगाई किसी
कोने में छुपी बैठी रहती है ।
अमीर के घर मंहगाई भी
रिश्ता कभी नही जोड़ती है ।

सारा सच पैसों की उनके 
पा अहमियत ही नही होती है ।
पैसा से उनकी तिजोरी
भरी हुई हमेशा रहती हैं ।

 गरीब खून पसीना बहाकर 
भी पैसा नही कमा पाते हैं ।
अमीर होटल में बैठकर
शराब पीकर खर्च कर देते है ।

मंहगाई को सरेआम अपने
कदमों तले ही नचाते हैं ।
किस चिड़िया का नाम मंहगाई है 
वो नही जानते समझते  है ।

नेताओं से मंहगाई की 
बात करो कहते हैं कुछ और
बड़ी जाने दो ले जाऊंगा ।
अगले चुनाव में बोट 
लेने जब आऊंगा  ।

अमीरों के घर सुबह शाम 
ऐसे रोज बहुत काम होते है ।
मंहगाई क्या कैसी होती है
अमीर लोग नही समझते है ।

मंहगाई की मार पड़ी है
कमर तोड़ ये मंहगाई है ।
दाल रोटी खाना मुश्किल है
कैसे हो बच्चों की पढ़ाई है ।

मंहगाई गरीबों के यहां रहती है
जिनको दाल रोटी भी बहुत ही 
मुश्किल से नसीब होती है ।
गरीब की किस्मत में होती है ।

 महाकवि डां अनन्तराम चौबे अनन्त
   जबलपुर म 

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