मेल- मिलाप - कमल धमीजा
प्यार की भावना
दिल में जगाए रखें
मेल-मिलाप का सबक
पढ़ाई रखें,
भारत के संस्कृति
सिखाती है भाईचारा
इसे धर्मो में न बांटो,
इंसानियत बनाई रखें।
इसको मारो उसको काटो
नफ़रत धर्म पे भारी है
नहीं सिलसिला आज का है,
सदियों से तो जारी है
एक सूरज इक चाॅंद है,
सबका यारों
एक हवा इक पानी है
खून लाल है सबका
फिर भी!
नफ़रत से भरी रवानी है
बेरुखी गद्दारी नफ़रते
रक्खा क्या है इन
बातों में
बेमतलब के किस्से छोड़ो
सब अपने हैं दोस्तों
मेल-मिलाप बनाई रखें!
स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
फरीदाबाद- हरियाणा
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