Thursday, 25 June 2026

समझौता - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

समझौता - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

(प्रतियोगिता हेतु साहित्यिक कविता)
समझौता करना पड़ता है,
जीवन की हर राह में,
कभी सपनों को मोड़ना पड़ता,
कभी अपनों की चाह में।
मन चाहे ऊँचे पर्वत छूना,
आसमान में उड़ जाना,
पर जिम्मेदारी के धागों से,
धरती पर ही जुड़ जाना।
कभी शब्दों को पी जाना,
कभी आँसू भी सह लेना,
कभी हार को गले लगाकर,
मुस्कानों में ढल लेना।
हर समझौता कमजोरी नहीं,
यह जीवन का ज्ञान है,
जो समय के संग चलना सीखे,
वही सच्चा इंसान है।
लेकिन इतना याद रहे,
स्वाभिमान न बिकने पाए,
लाख समझौते कर लेना,
पर सत्य न झुकने पाए।
जीवन की इस लंबी डगर में,
यही अनुभव का नाता है,
जो संतुलन रखना सीख गया,
वही जीवन जी पाता है।
समझौता यदि विवेक से हो,
तो वह शक्ति बन जाता है,
और यदि अन्याय से हो,
तो मन को बहुत रुलाता है।
इसलिए समझौता करना,
सोच-समझकर ही सीखो,
सत्य, प्रेम और स्वाभिमान संग,
जीवन का दीपक लिखो।॥

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

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