Monday, 7 September 2026

रिश्तों की डोर—राखी का त्योहार / डॉ अनुपमा वर्मा

 रिश्तों की डोर—राखी का त्योहार

कलाई पर सजे धागे में,
बहन का सारा प्यार है,
भाई की हर मुस्कान में,
बहन का ही संसार है।
राखी केवल धागा नहीं,
विश्वासों का बंधन है,
सुख-दुःख में साथ निभाने का,
पावन-सा आश्वासन है।
बचपन की वो मीठी यादें,
वो लड़ना और मनाना,
छोटी-छोटी बातों पर रूठना,
फिर हँसकर गले लगाना।
मिठाई की खुशबू घर भर दे,
खुशियों से आँगन महके,
बहन की दुआएँ साथ रहें,
भाई के सपने चमके।
न हो कोई स्वार्थ जहाँ पर,
न कोई हिसाब-किताब,
भाई-बहन के प्रेम से बढ़कर,
नहीं कोई रिश्ता लाजवाब।
ईश्वर से बस यही प्रार्थना—
सदा रहे यह प्यार,
हर जन्म मिले भाई-बहन का,
और अटूट रहे यह संसार।
राखी का यह पावन पर्व,
लाए खुशियाँ अपार,
भाई की कलाई पर सजे,
बहन का स्नेहिल प्यार।
धागा छोटा हो सकता है,
पर भाव बहुत महान—
राखी में बंध जाता है,
दो दिलों का पूरा जहान।

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab 

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