त्यौहार / कमल धमीजा
हर तरफ है रौनकें महका हुआ बाजार है,
हाल-ए-दिल जी सुनो सब लग रहा बेकार है।
हो रहीं पलकें मिरी गीली तुम्हारी याद में,
लौट आ भैया तुम्हारे संग में त्यौहार है।
चूम लेती हाथ हैं ये रंग बिरंगी राखियां,
हो जहाँ भी लौट आओ रो रहा परिवार है।
ओढ़ कर खामोशियों को दूर इतना हो गए,
माँ तुम्हारी याद में भैया बहुत बीमार है ।
याद को दिल में समेटे जी रही हूँ बस "कमल",
सामने भगवान के क्यों हम सभी लाचार है।
स्वरचित मौलिक अधिकार रचना
कमल धमीजा
- हरियाणा

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