अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु
कानून - विरोध . महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर
कानून कागजों की
किताबों में लिखे हुए हैं ।
थानों कोर्ट कचहरी में
इनसे न्याय मिलता है ।
देश की संसद में भी
कानून बनते बदलते हैं
कानून जनता को न्याय
दिलाने को बनाये जाते हैं।
आरक्षण एस सी एस टी एक्ट
यू जी सी कानून विरोध का पूरे देश में आन्दोलन हो रहा है ।
कानून का दुरूपयोग हो रहा है ।
झूठी एफ आई आर लिखाओ
सरकार से लाखों रुपया पाओ ।
बिना जांच गिरफ्तार कर लेते
जमानत प्रवधान नहीं जेल भेजते।
सारा सच है कानून
अंधा है लंगड़ा भी है।
वैशाली के सहारे चले
देख भी नही सकता है ।
ये बात सिर्फ में नहीं
सभी जानते हैं ।
जो भुक्त भोगी है
वह तो जानते ही है ।
हर कोई कहता है ।
देश का कानून अंधा है ।
अंधा तो है ही बहरा भी
कानून लंगड़ा भी है ।
न देख सकता है
न सुन सकता है
न कह सकता है
न चल सकता है ।
वैसाखी के सहारे
धीरे धीरे से चलता है ।
न्याय मिले न मिले साक्ष्य
गवाहों पर ही चलता है ।
फैसले में ही दस बीस
तीस साल भी लग जाते है ।
फैसले से जो संतुष्ट नहीं है ।
बडी अदालतों में अपील करते है ।
फैसला होने के वाद
भी न्याय नहीं मिलता है ।
सबूतों गवाहों वकीलों की
जिरह पर फैसले होते हैं ।
सारा सच तारीख पर तारीख
अदालतों में मिलती रहती है ।
कुछ सबूत मिट जाते है कुछ
गवाहों की मृत्यु हो जाती है ।
कुछ गवाह खरीद
भी लिये जाते है ।
कुछ धमकियों से
भी डर जाते है ।
कुछ गवाही देकर भी
बाद में पलट जाते है ।
कुछ गुनाहगार संदेह
की हालत में छूट जाते है ।
कुछ नाबालिग होने
का फायदा उठाते है ।
कुछ वाद में जमानत
पाकर छूट जाते है ।
न्याय की ऐसी लम्बी
लड़ाई से कुछ गुनाह गारों
की, न्याय पाने बालों की
मौत भी हो जाती है ।
सारा सच अंधे कानून
की इस लड़ाई में वकील
पुलिस, बाबूओं को
पैसा देते देते ज़मीन
जाय जाद विक जाती है ।
कुछ लोग कोर्ट और
वकीलों की महंगी फीस
से हिम्मत हार कर
केश ही नहीं लगाते है ।
या लगाकर भी फिर
वापिस ले लेते है ।
कानून के अंधेपन
से ही डर जाते है ।
वकील दोनों पक्ष के होते
पर जीत एक पक्ष की होती है ।
कोई जीतता कोई हारता है
फीस वकीलों को मिलती है।
महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
जबलपुर म प्र

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