Tuesday, 27 October 2026

श्रेृष्ठ से श्रेृष्ठतम आयम राम - डाॅ० योगेश सिंह धाकरे "चातक"

श्रेृष्ठ से श्रेृष्ठतम आयम राम - डाॅ० योगेश सिंह धाकरे "चातक"

जीबन एक रंगमंच है..
किरदार अनेक  है।
प्रस्तुतियाँ  देनी  होगीं..
सरदार तो एक  है।

ईश्वरीय रंगमंच शाला के..
सुख दुख दो विधान है।
दुख मे निखर के सामने..
आ गया वो भगवान है।

किरदार पुत्र का हो तो..
मर्यादा के राम बन जाओं।
तुलसी व्यक्त ना कर सकें..
ऐसे आयाम बन जाओ।

भूमिका भ्रात  की  हो तो, ..
भरत वाला वैराग्य चाहिये।
लखन जी जैसा सर्मपण"..
पराक्रम का भाव चाहिये।

भुमिका  भार्या  की  है  तो..
सीता वाला सतीत्व चाहियें।
दुखों से दो दो हाथ करता..
महानतम व्यक्तित्व चाहियें।

पितृ भूमिका मै भागीरथ के, 
उन  प्रयासों  को  नमन।
पतित पावनी माँ गंगा के, 
उस अवतरण को नमन।

भुमिका कोई भी हो जीवन..
प्ररणादाई  बन जायें।
कसौटी पर कस लो ऐसा..
व्यक्तित्व निखर जायें।

रीयल हीरो रील मै नही,
साहित्यो मै  मिलते  है।
मन वचन कर्म त्याग के,
पराक्रमों  से  बनते  है।।

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स्वरचित...
डाॅ० योगेश सिंह धाकरे "चातक"
{ओज कवि} अलीराजपुर  म. प्र. 
@ सर्वाधिकार सुरक्षित...©®

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