सेवा - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
सेवा करो मेवा मिलेगा, बचपन से सुनते आए हैं। भारतीय सेवा का आदर्श वाक्य 'सेवा परमो धर्म:' ,'सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है'
हमारे बुजुर्ग हमें बताएँ हैं।
सेवा करो सबकी, जितना तुमसे संभव हो।
आशीष पाओ सबका, प्रगति तुम्हारी निरंतर हो।
सेवा जब भी किसी की करना, रहे
नि: स्वार्थ भाव।
सद्मार्ग पर सदा चलना, करना सबसे अच्छा बर्ताव।
त्रेता युग में सेवा की हनुमान जी ने प्रभु राम की,
सीता की खबर विभु को सुनाई।
संजीवनी बूटी लाकर, लक्ष्मण जी की जान बचाई।
सीना चीरकर प्रभु राम और माता सीता की छवि अपने दिल में दिखलाया।
माता सीता से अष्ट सिद्धि नव निधि का, दाता होने का वरदान पाया।
सेवा किया श्रवण कुमार ने, अंधे माता-पिता को कांवर पर बिठा,
चारों धाम कराने का ठान लिया।
सेवा किया लक्ष्मण जी ने प्रभु राम का,
चौदह वर्ष तक नींद का त्याग किया।
आगे-आगे चलकर लक्ष्मण जी रास्ते का कांटा-पत्थर साफ किये, हर पल प्रभु के साथ रहे।
सेवा किया गणेश जी ने, माता-पिता को ब्रह्मांड मान
उनकी ही परिक्रमा किये।
सेवा क्या है, ऋषि पुंडरीक ने बताया।
माता-पिता के चरण दबाने में लीन, प्रभु कृष्ण को भी इंतजार कराया।
सेवा, समर्पण का भाव क्या होता है, भक्त आरुणि हमे़
बता गए।
मेढ़ से पानी रोकने हेतु, खुद ही लेट गये।
शिष्य से प्रसन्न हो, गुरु धौम्य ने आशीर्वाद दिए।
भक्त आरुणि 'उद्दालक' नाम से विख्यात हुए।
शिष्य उपमन्यु ने, निष्ठा से गुरु की सेवा की।
भूख और तकलीफ
से हार न मानी,
दिव्य ज्ञान प्राप्त की।
सेवा करना तो कभी भी, अभिमान मत करना।
लालच से दूर रह, सच्चे मन से सेवा करना।
दूसरों को ईश्वर का अंश मानो, उनकी सेवा करो।
किसी को कोई हानि न पहुंचे, इसका ध्यान सदा धरो।
'ते प्राप्नुवन्ति मामेव सर्वभूतहिते रता:'
भगवान श्री कृष्ण ने बताया।
सेवा करने वालों को ईश्वर का अशीष मिलता, यही हमें सबने समझाया।
तन से सेवा, मन से सेवा, धन से सेवा,
जो भी बन पड़े करो।
किसी के मन के भाव को समझो, बिना कहे उसकी जरूरत पूरी करो।
सीमा पर हमारे सैनिक, देश की सेवा करते हैं।
उनके कारण हम आज, शांति से घर में रहते हैं।
औरों की सेवा करने से, अपना मनोबल बढ़ता है।
हृदय में करुणा उत्पन्न होती, मन को शांति मिलती, आत्मिक आनंद मिलता है।
डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
वैस्ट बंगाल

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