Tuesday, 27 October 2026

दशहरा एक नजर में - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ

दशहरा एक नजर में - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
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 दशहरा के पावन पर, 
 जागे सही सद्विचार। 
 
 सत्य धर्म की राह पर, 
 करें जगत  का उद्धार। 

 रावण का पुतला जलाने से, 
 मिटता नहीं विकार। 

 मन के भीतर छिपे रावण पर, 
 करना होगा प्रहार। 

 दस सिर वाले रावण का,
 इतिहास हमें बताता है। 

 ज्ञान,सत्य और अहंकार भी, 
 विनाश स्वयं बुलाता है। 

राम बने आदर्श हमारे, 
मर्यादा के धाम। 

सत्य,प्रेम और न्याय से, 
ऊंचा होता नाम। 

 क्रोध, लोभ और मोह मिटाएं,
 त्यागें मन का मान।

 ईर्ष्या ,लोभ और कपट छोड़कर,
 बनें सच्चे इंसान।

 नारी का सम्मान करें,
 यही धर्म का सार।

 जिस घर में नारी पूजित हो,
 खुशियाँ वहां अपार।

 जाति- धर्म के भेद बुलाकर,
 प्रेम का दीप जलाएं।

 मानवता के पथ पर चलकर,
 भारत का मान बढ़ाएं।

 अन्यायों के विरुद्ध खड़े हों,
 सच का साथ निभाएं।

 निर्बल को संबल देकर,
 मानव धर्म निभाएं।

 केवल पर्व मनाने से, 
 परिवर्तन नहीं आएगा।

 जब आचरण शुद्ध न होगा,
 अंधकार नहीं जाएगा।

 रामराज का स्वप्न तभी,
 साकार यहां हो पाएगा। 

जब हर जन अपना कर्तव्य, 
ईमानदारी से निभाएगा। 

आओ मिलकर शपथ उठाएं,
सत्य की राह चलेंगे।

द्वेष मिटाकर प्रेम बाटेंगे, 
दीप  सद्भाव के जलेंगे।

 विजयादशमी यही सिखाती,
 सत्य कभी न हारता।

 धैर्य ,धर्म और नेक कर्म से,
 मानव का जीवन संवरता।

 कहते हैं” कविवर सुरेश कंठ “,
 सुलभ है यही मूल मंत्र।

 कभी नहीं इसे भूलना है,
 याद रखना है सही तंत्र। 
            जयहिंद 
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    रचयिता ;- 
     वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ 
  बथनाहा,अररिया ,बिहार।

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