चयन - डॉ नसीमा निशा
बहुत दिनों से समर्थ की ख्वाहिश थी कि उसे बड़ा मंच मिले, उसके संगीत की उसके योग्यता की सराहना हो, दुनिया मे उसको, उसके नाम से जाना जाये, उसका बहुत नाम हो.
"आज उसका सपना पूरा होने जा रहा था "
उसे दिल्ली से बुलावा आया था,
वह बहुत खुश था
क्योंकि उसके घर की सारी ज़िम्मेदारी, अर्थ व्यवस्था उसी के सर पर थी, अब सब सुधरने का ख़्वाब सच होता दिख र
हा था l
हा था l
जब समर्थ कार्यालय पहुंचा सब कुछ उसे रोमांचित कर रहा था, वह बहुत ख़ुश था
समर्थ को प्रोग्राम के, संस्थापक आयोजक ने बुलाया था अपने केबिन में l
समर्थ को मानो पँख लग गये थे , वह खुद को मंच पर पहला नंबर आने वाला देख रहा था,
चारों तरफ से उसके कानों में तालियों की आवाज़ेँ आरही थी l सहसा वह केबिन के दरवाज़े पर ठिठक गया खट -खट करते ही दरवाज़ा खुला
वह अंदर चला गया l
कुर्सी पर बैठी
अधेड़ महिला जो कि कार्यक्रम की डायरेक्टर थी, उसने इशारे से चपरासी को बाहर जाने को बोला l
वह सर नीचे किये जैसे अपराध बोध में डूबा हो बाहर चला गया l
समर्थ ने "गुड इवनिंग मैम" बोला और बहुत ख़ुशी से जवाब का इंतज़ार किया, मगर ऊँगली से इशारा किया महिला ने
" बैठ जाओ "
तुम्हारा गाना, वीडियो सुना है मैंने
फाइनली चयन के लिए कल सुबह तुम्हें कॉल कर दिया जाएगा l
एक सेवा मुझे देनी होगी तुमको, और उस सेवा के बाद ज़बान खोलने की क़ीमत तुम्हें
बहुत महंगी हो सकती है l
"समर्थ कुछ समझ नहीं पा रहा था "
मैम क्या कह रही हैं?
कैसी सेवा?
समर्थ घबराकर बोला
" मैम "
"नहीं कुछ समझा नहीं "
महिला बोली बस एक रात के के लिए तुम को मेरे बँगले पर आना होगा
सिर्फ आज के लिए l
क्योंकि मेरा जिगोलो आज नहीं आएगा
तुमको जिगोलो बनना होगा l
समर्थ कुछ नहीं समझ सका, फिर बोला
जिगोलो आप के नौकर का नाम है न?
कोई बात नहीं मैम आजाऊँगा l
" नहीं " "नहीं"
"नौकर नहीं "
ओह!
स्टुपिड!
गूगल पर कुछ ढूंढने आता है कि नहीं तुम्हें??
समर्थ बोला "हाँ हाँ हाँ " आता है
तो, महिला बोली
ढूंढ़ लेना गूगल पर
देख लेना जिगोलो का मतलब और आजाना
अगर तुम रात पास हुए तो..
सुबह तुमको फोन जायेगा कि तुम्हें कौनसा मंच मिला कौन सा गाना गाना है ओके l
समर्थ नासमझ कान खुजाता हुआ बाहर आगयाl
अब वह गूगल पर सर्च कर रहा था
जैसे ही अर्थ मिला तो वह सन्न रह गया
समर्थ की"आँखे फटी की फटी
रह गईं" l
डॉ नसीमा निशा
वाराणसी - उत्तर प्रदेश

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