अर्थव्यवस्था का चक्र - डॉ अशोक जाटव
बढ़ती महंगाई व्यवस्था डगमगाई
मिश्रित अर्थव्यवस्था
भारत की गहराई
दिनों दिन बढ़ती जा रही महंगाई
मुद्रास्फीति की स्थिति स्पष्ट नज़र आई
वैश्विक ऊर्जा की कमी
ईरान अमेरिका युद्व में आई
हाय महगांई मार गई
गैस की किल्लत
डीजल पेट्रोल की फजीहत
चल रही है मारा मारी
बढ़ रही बेगारी
शासन की मुफ्त योजनाओं से
इंसान कर रहा है मक्कारी
ऐसे ही पैदा हो रही हरामखोरी
करो मुफ्त की रेवड़ियां बंद
रोजगार के अवसर लाना है
जीडीपी को बढ़ाना है
देश में आर्थिक प्रगति लाना है
नौकरियों और बेहतर वेतन के
अवसर लाना है
मंदी को दूर भगाना है
सकल घरेलू उत्पाद बढ़ाना है
ब्याज दर करना है कम
चाहे कैसी हो इनकम
दो मौके सभी को समान
सभी को मिले सम्मान
बढ़ती मांग की करना आपूर्ति
बढ़ाओ उत्पाद इतना की सभी
की हो पूर्ति
स्वरोजगार को दो प्रोत्साहन
तो हर इंसान रहे खुशहाल
देश बने सुदृढ़
ताकि अर्थव्यवस्था हो दृढ़
अर्थव्यवस्था है राष्ट्र की पहचान का प्रतीक
इसमें सहयोग करने का फर्ज है हर नागरिक।
*डॉ अशोक जाटव व्याख्याता भोपाल मध्यप्रदेश*

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