कलम की आवाज़ / डॉ अनुपमा वर्मा
कलम की आवाज़
खबरों के इस शोर में,
सच की तलाश करता है पत्रकार,
हाथों में कलम लिए,
बन जाता है जनता की आवाज़ अपार।
जो दिखता है, वह लिखना आसान,
जो छिपा है, उसे सामने लाना है काम,
सवालों से जब सत्ता घबराए,
तब पत्रकार ही सच का आईना बन जाए।
मारपीट हो या धमकी का दौर,
कलम न झुके, न हो कमजोर,
डर के आगे सच हार न जाए,
हर खबर अपनी आवाज़ उठाए।
अखबार के हर एक पन्ने पर,
किसी की उम्मीद लिखी होती है,
कहीं दर्द की कहानी होती है,
कहीं इंसाफ की निशानी होती है।
मीडिया बिके नहीं, झुके नहीं,
सच की राह से हटे नहीं,
जिसकी आवाज़ दबा दी जाए,
पत्रकार उसकी आवाज़ बन जाए।
सवाल पूछना अपराध नहीं,
सवालों से ही बदलाव आता है,
जब कलम ईमानदार हो जाए,
तो इतिहास नया लिख जाता है।
न्यूज़ सिर्फ खबर नहीं होती,
यह समाज का आईना होती है,
पत्रकार की निर्भीक कलम ही
लोकतंत्र की सच्ची प्रहरी होती है।
कलम रहे आज़ाद सदा,
सच का सूरज चमकता रहे,
हर पत्रकार निर्भीक बने,
और देश यूँ ही जागता रहे।
डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
पंजाब

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