15 अगस्त - वीरेंदर
फिर से आ गया 15 अगस्त,
दारू पी सब हो जायेंगे मस्त.
पतंग उड़ाएंगे,शोर मचाएंगे,
ढोल बजायेंगे नाचेंगे जाएंगे.
दिन भर पिएंगे, बियर शराब,
खूब खाएंगे टिक्के कबाब.
जगह जगह लहरायेंगे तिरंगे झंडे,
स्वतंत्रता दिवस को बना देंगे "फन डे".
पार्टी का होगा पूरा बंदोबस्त,
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
सबको है व्यक्तिगत आजादी की आशा,
इसीलिए तिरंगे की बना दी नयी परिभाषा.
केसरिया कहता, हमेशा रहो दबंग,
श्वेत कहता राजनीती करो, मत करो तुम जंग.
हरा कहता समृद्ध और सजे रहो,
चक्र कहता 24 घंटे बस मज़े लो.
कोने में चुप-चाप खड़ा तिरंगा,
सब अपने में व्यस्त.
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
नेता भी अपने देंगे वही पुराना भाषण,
मिलेगा सबको मकान, मिलेगा सस्ता राशन.
देश भक्तो को झूटी श्रद्धांजलि देंगे,
अपनी नीतियों से सेकड़ो जवानो को मार देंगे.
सुबह लहरायेंगे तिरंगा शाम को करेंगे पार्टी,
जनता को दिखाएंगे सपने, खुद देखेंगे पिक्चर डर्टी.
नेता रहेगा मस्त जनता होगी पस्त.
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
अपने अपने लिए सब तिरंगा लहराते,
सरकारी छुट्टी के रूप में 15 अगस्त मनाते.
भ्रष्टाचार ने कर दिया देश का बंटाधार,
आजादी के परवानो का क्या स्वप्न होगा साकार?
क्या ऐसी आजादी के लिए वो लडे थे?
अब सोचते होंगे के हम गुलाम भले थे,
देश की किसी को परवाह नहीं,
देशभक्त बनने की अब चाह नहीं.
देश की छोड़ो खाओ,गरम समोसे,
देश तो अपना चलता है भाई राम भरोसे.
घूमने का बनाते है कोई प्लान जबरदस्त,
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
क्योंकि फिर से आ गया है15 अगस्त ||
विरेंद्र
वीरेंदर
दिल्ली

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