आन लाइन - श्रीमती राज फौजदार
“आन लाइन एक नई दुनियाँ ,एक नया अहसास “आन लाइन होना, अर्थात दूरियों का का आभास न होकर हम आमने -सामने बैठ कर बात कर सकते हैं,।
आज सभी आन लाइन हैं,एक क्लिक पर दुनियां मुट्ठी में हैं।क्या सचमुच हम जुड़ें हुए हैं?? नहीं!ई!ई!ई?
अब तो सुबह का शाम तक याद नहीं रहता कि हमारी बात भी हुई थी। पहले चिट्ठियों का जमाना था डाकिया की साइकिल की टन् -टन् सुनकर सारा मुहल्ला दरवाज़ों पर खड़ा मिलता और —---भैया हमारी है बड़े सोच विचार के साथ डाकिया जवाब देता कि -सीमा पर गये बूँढी माँ का या नई नवेली दुल्हन की आस न टूट जाय।
उस इंतजार में कितना प्यार और एहसास हुआ करते थे।एक पत्र लिखने में पूरा जमाना और गुजरे हुए दृश्य आँखो में उतर आते थे।इसी प्रकार पढ़ने में भी एक बार पढ़कर जी नहीं भरता तो बार बार पढ़ते थे तब दूर हो कर भी कितने पास थे हम।
माना कि आंन लाइन ने हमें बहुत कुछ दिया है, ज्ञान, दूरभाष, संदेश पल भर में,पैसा पै टी एम,फौन पे,यूं पी आई आदि जरूरत पड़ने पर तुरंत मिल जाता है, महीनों का काम दिनों में और दिनों का घंटे मिनट में हो जाता है।
(१) आनलाइन के फायदे:-
रोज़गार:घर बैठे मिल जाता है,घर बैठे इंटरव्यू,घर बैठे काम करना,घर बैठे घर का सामान मंगा लेना समय की बचत भीड़ भाड़ से बचाव आनलाइन आवेदन।
बरिष्ठ नागरिकों को घर बैठे बैंकिंग सुविधाएं जरुरत की दवाइयां और आवश्यकता की बस्तुऐं मिल जातीं हैं ।
आनलाइन के नुकसान:--
इसने इंसान को आलसी और पंगु बना दिया है। आनलाइन साधन है साध्य नहीं साध्य तो आज भी प्रेम ही है परिवार के पास बैठना उनसे बातें करना साथ -साथ चाय पीना और भोजन साथ करना जिससे खाने बाला भी और बनाने बाला भी खिला कर खुश। इससे घर के बुजुर्गों को सबसे ज्यादा तकलीफ़ होती है।
कहते हैं कि जब तक किसी चीज़ का एक सीमा तक उपयोग करें तब ही बह ठीक और फायदे की होती है अन्यथा घातक।
कबीर दास जी का दोहा है:-
“अति का भला न बोलना,अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना,अति की भली न धूप।।”
ठगी का सबसे बड़ा डर:-
नकली वेवसाइट, नक़ली लिंक,आपका खाता बंद साइबर क्राइम,आजकल भले भले इसके चंगुल में फंस रहे हैं और लाखों से हाथ धोना पड़ जाता है।
फिजूलखर्ची जिसकी जरूरत नहीं वह भी खरीद जाता है
बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर हो रहा है,आँखें कमजोर होना चिड़चिड़ापन सहनशीलता की कमी आज पैदा हुआ बच्चा एसी, टीवी, का रिमोट मोबाइल को जानने लग जाता है।
आनलाइन के सुरक्षित तरीके:-
(१) लिंक पर कभी भी क्लिक नकरें(बैंक कभी भी SMS में लिंक नहीं भेजता।
(२)COD से शुरू करें -पहली बार किसी नई साइट से सामान मंगायें तो Cash onDeliveryलें।
(३) UPI पिन किसी को न बताएं –पिन सिर्फ पैसा भेजने के लिए लगता है तो पहले एक दो रूपये भेजकर चैक करें।
(४) बड़ी रकम से पहले छोटी रकम से टैस्ट करें।
(५) एक ही फ़ोन में सब कुछ न रखें, बैंकिंग बाला फ़ोन अलग,सोसल मीडिया अलग रखें।
निष्कर्ष:-आनलाइन एक नदी की तरह है।तैरना आता है तो पार नहीं तो डूबने का खतरा रहता है।सामान मँगाना हो या पैसा भेजना हो सभी आँख खोलकर होश में रहकर करना चाहिए।।
आनलाइन रहना समझदारी से —----आफ लाइन रहना जीवन जीने रिश्ते बचाये रखने के लिए।
श्रीमती राज फौजदार
बोदला रोड आगरा (उत्तरप्रदेश )

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