Monday, 19 October 2026

नशा मुक्ति - उर्मिल गुप्ता

नशा मुक्ति - उर्मिल गुप्ता

मज़े मज़े में पहले जब कोई करता है नशा
फिर पड़ जाती है लत ,हो जाती है दुर्दशा।
दिन भर की कड़ी मेहनत की कमाई उड़ा कर 
क्या खरीदते हो- एक बोतल, वह भी जहर भरा कर।
गैर कानूनी ढंग से जब पीते हो अवैध शराब
कर लेते हो अपनी किडनी, लीवर सब खराब।
जीवन सुधारने को अब तो करो कोई युक्ति
चलो सब मिल अपनाएं नशा मुक्ति।
क्या तुम्हें नहीं दिखता घर में पसरा सूनापन
नन्हे नन्हे बच्चों का सहमता- घुटता बचपन।
जिस पत्नी की आंखों में कभी बसता था सपना 
वह पैबंद लगी धोती से ढांपती  है तन अपना।
निवाले भी गिन गिन कर मिलते हैं खाने को
इतना भी होश कहां कि सोचे जवान बेटी ब्याहने को।
नशे के बोझ से जवानी में भी कमर झुकती
चलो सब मिल अपनाएं नशा मुक्ति।
नशा नहीं देखता कोई अमीर है या गरीब 
बिगड़ जाता है सभी पीने वालों का नसीब।
चाहे हो सिगरेट, शराब या ड्रग्स की हो बात
सभी में बद से बदतर हो जाते हैं हालात ।
फिर अपराधिक दुनिया में भी रख लेते हो कदम
कानून विरुद्ध लूटपाट,हत्या जैसे करते हो करम।
नरक यही मिलता है याद करो यह सूक्ति।
चलो सब मिल अपनाएं नशा मुक्ति।
गर मन में ठान लो, तो इससे दूरी बना सकते हो
अपने परिवार के लिए नई सुबह ला सकते हो।
फिर लौट आएगी पत्नी ,बच्चों की प्यारी मुस्कान
तुम्हारा शरीर भी स्वस्थ होकर मानेगा एहसान ।
अब भी समय है जीवन की राह नहीं रुकती ।
चलो सब मिल अपनाएं  नशा मुक्ति।।

उर्मिल गुप्ता🙏
Delhi 

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