Monday, 19 October 2026

लोकतंत्र एवं सरकार - एम. एल. नत्थानी

" अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच "
****************
( मेरी कलम मेरी पहचान )
सत्र :- 351
प्रतियोगिता का विषय -
( सरकार, गैरकानूनी, अवैध, लोकतांत्रिक, नाजायज, अनधिकृत, कानून विरुद्ध, अवैधानिक, प्रतिबंधित, अपराधिक, अवैधता )
****************

विधा - पद्य ( कविता )
कविता का शीर्षक -
" लोकतंत्र एवं सरकार - एम. एल. नत्थानी 
---------------------

लोकतंत्र में जनता रैलियों 
की हर जगह शोभा बढ़ाती 
पुराने वादे भूलकर अपनी 
कमजोर याददाश्त छुपाती 

नित्य मांगते वैध - अवैध 
सभा स्थल में प्रवेश निषेध 
कानून व्यवस्था में जो कैद 
रील बनाने वाले है मुस्तैद 

नये शब्द फिर गढ़े जाएंगे 
सपनों के सौदे मढ़े जाएंगे 
पुष्प हार से वह चढ़े जाएंगे 
न्याय के कसीदे पढ़े जाएंगे 

धरने प्रदर्शन की भरमार होगी 
वोटरों की ही दरकार होगी 
जनसेवा की जयकार होगी 
चापलूसों की दरबार होगी 

दर्शक दीर्घा में जनता बैठी 
वादों पर तालियां बजाकर 
पुराने जख्मों को भूलकर 
वोटों को थाली में रखकर 

लोकतंत्र का यह उत्सव भी 
सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाता 
जनता जनार्दन की बेबसी 
पर कोई भी नहीं पछताता 

चकाचौंध देखकर मंच पर 
क्यों लगता धुंधला नेपथ्य 
दर्शक दीर्घा की खामोशी 
यह सम्मानित मंच का सत्य 

जनप्रतिनिधि पधारे मंच पर 
करतल ध्वनि से स्वागत है 
बेबस जनता निहारती रही 
अंतर्मन फिर क्यों आहत है 

धरने प्रदर्शन की ये पटकथा 
तो पहले से निर्धारित है 
लोकतंत्र की यह घोषणाएं 
सुनकर यह मन विचलित है 

पद्य ( कविता ) के रचनाकार का विवरण :-
****************

नाम - एम. एल. नत्थानी 
 ( छत्तीसगढ़ )

प्रमाण पत्र - यह हमारी वाणी और सारा सच ( मीडिया ) के राष्ट्रीय हिन्दी समाचार पत्र द्वारा साप्ताहिक प्रतियोगिता - सत्र - 351 के लिए प्रेषित पद्य ( कविता )
पूर्णतः मौलिक रचना है ।

No comments:

Post a Comment